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वैक्सीनेशन पर दूर हुई उलझन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को मुफ्त में टीके लगवाने का इंतजाम करेगी। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर से उबरने की प्रक्रिया में है, लेकिन खतरा टला नहीं है। दूसरी लहर के उतार के बीच जो थोड़ा-बहुत समय हमें मिला है, उसका सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल नहीं किया गया तो फिर से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसीलिए अगर प्रधानमंत्री ने खुद सामने आकर देश को यह बताया है कि वह सरकार की टीका नीति में महत्वपूर्ण बदलाव कर रहे हैं तो यह निश्चित रूप से एक शुभ संकेत है। काफी समय से यह मांग की जा रही थी कि पल्स पोलियो मुहिम समेत अब तक के तमाम टीकाकरण अभियानों की तरह कोरोना का टीका भी सबको मुफ्त लगाया जाना चाहिए। यह लोगों को सरकार की ओर से किसी तरह की सुविधा या सामान मुफ्त देने की बात नहीं थी। यह उनका जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षित करने का मामला था, जो उनका संवैधानिक अधिकार है। इतना ही नहीं, अर्थव्यवस्था के लिहाज से देखा जाए तो भी सबको सुरक्षित किए बगैर देश की आर्थिक तरक्की सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

साफ है कि यह फैसला महामारी के खिलाफ जंग में मील का पत्थर साबित हो सकता है। टीका खरीदने की कथित लिबरलाइज्ड पॉलिसी से जो गफलत पैदा हुई थी, ताजा घोषणा से वह भी दूर हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी उस पॉलिसी की तीखी आलोचना की थी। अलग-अलग कीमतों से भ्रम और असमंजस तो पैदा हो ही रहा था, राज्यों पर अलग से टीके खरीदने की जिम्मेदारी डालने से परस्पर दोषारोपण की प्रक्रिया भी बहुत तेज हो गई थी। राज्य शिकायत कर रहे थे कि उन्हें कंपनियां जरूरत से काफी कम टीका दे रही हैं। इस बीच, राज्यों ने टीका खरीदने के लिए जो ग्लोबल टेंडर दिए, उनका भी कोई नतीजा नहीं निकला। इसलिए एनबीटी ने भी अपने संपादकीय में केंद्र से राज्यों की ओर से टीका खरीदने की अपील की थी। अब जब केंद्र सरकार ने यह साफ कर दिया है कि राज्यों के हिस्से की ओर से भी वही वैक्सीन खरीदेगी तो किसी संदेह या असमंजस की गुंजाइश नहीं रही। इसी मौके पर प्रधानमंत्री द्वारा गरीब कल्याण अन्न योजना को दीपावली तक बढ़ाने की घोषणा भी महत्वपूर्ण है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी बड़े पैमाने पर उद्योग-धंधों और रोजगार पर बुरा असर हुआ। ऐसे में इस पहल से देश की 80 करोड़ गरीब और जरूरतमंद आबादी को बड़ी राहत मिलेगी। कुल मिलाकर देखें तो सोमवार को हुई घोषणा सरकार की नीतियों में ऐसा संशोधन है, जो महामारी के खिलाफ हमारी मोर्चेबंदी को मजबूत करेगा।

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