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तीन बच्चों की इजाजत

चीन सरकार ने अपनी बहुचर्चित बर्थ कंट्रोल पॉलिसी में अहम बदलाव लाते हुए घोषणा की है कि अब वहां हर विवाहित जोड़े को तीन बच्चे पैदा करने की इजाजत होगी। चीन में 1980 से सिंगल चाइल्ड पॉलिसी पूरी सख्ती से लागू थी। 2016 में अचानक इस नीति में संशोधन करते हुए कहा गया कि सभी मैरिड कपल दो बच्चे पैदा कर सकते हैं। पांच साल बाद अब इस सीमा को बढ़ाकर तीन कर दिया गया है। देश की जनसंख्या नियंत्रण नीति में इस तरह का बार-बार बदलाव बताता है कि इस नीति में कहीं कोई बड़ी गड़बड़ी है। जब चीन ने सिंगल चाइल्ड पॉलिसी को सख्ती से लागू करना शुरू किया, तब भी यह कहा गया था कि सभ्य समाज में ऐसी जबर्दस्ती अच्छी चीज नहीं है और यह भी कि आगे चलकर इस नीति के गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इन बातों से बेपरवाह चीन ने यह नीति जारी रखते हुए जनसंख्या वृद्धि पर काफी हद तक काबू पा लिया और तेज आर्थिक विकास भी सुनिश्चित किया। लेकिन इसके साथ ही वहां की आबादी का स्वरूप भी बदलता गया। समाज में वृद्धों-बुजुर्गों की संख्या बढ़ गई और श्रमशील आबादी का प्रतिशत कम होता गया। नतीजा यह कि जहां आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है, वहीं आबादी के घटने का खतरा भी उपस्थित हो गया है।

आंकड़े बताते हैं कि चीन में जन्म दर पिछले चार सालों में लगातार गिरी है। पिछले साल वहां कुल 1.2 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ, जबकि 2019 में 1.46 करोड़ बच्चे पैदा हुए थे। एक साल में यह 18 फीसदी की गिरावट थी। वहां फर्टिलिटी रेट यानी एक महिला द्वारा पूरे जीवन काल में जन्म देने वाले बच्चों की औसत संख्या 1.3 है, जबकि आबादी का समान स्तर बनाए रखने के लिए आवश्यक संख्या 2.1 मानी जाती है। जाहिर है, 2016 में बच्चों की संख्या में छूट देने का कोई लाभ नहीं हुआ और विशेषज्ञों के मुताबिक इसे बढ़ाकर तीन करने का भी शायद ही कोई फायदा हो। वजह यह है कि लोग इस छूट का इस्तेमाल करने की मन:स्थिति में ही नहीं हैं। सिंगल चाइल्ड पॉलिसी के दौर में पैदा हुए और पले-बढ़े लोग यह महसूस नहीं कर पा रहे कि बच्चे को भाई-बहनों की भी जरूरत होती है, उनके व्यक्तित्व के विकास में इससे मदद मिलती है। बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा-दीक्षा का खर्च बढ़ गया है। बच्चे के साथ-साथ परिवार के बुजुर्गों की भी जिम्मेदारी संभालने में पस्त लोगों के लिए बच्चों की संख्या बढ़ाने की सोचना मुश्किल है। यही नहीं, देर तक काम करने का कल्चर भी इसमें बाधा बन रहा है। कुल मिलाकर देखें तो सरकार की सख्ती ने चीनी समाज को एक ऐसी परिस्थिति में पहुंचा दिया है, जहां से निकलने की कोई सीधी सरल राह नहीं दिख रही।

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