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केंद्र ही खरीदे टीका

दिल्ली सरकार ने कोवैक्सीन की कमी की बात कहते हुए 18-44 साल आयुवर्ग के लिए चल रहे 100 टीकाकरण केंद्र बंद कर दिए हैं। उधर, महाराष्ट्र ने भी 18-44 साल आयुवर्ग के लिए टीकाकरण रोक दिया है। इस वर्ग के लिए उसके पास 10 लाख खुराक थी, जिनका इस्तेमाल वह 45 साल से अधिक उम्र वालों को दूसरी खुराक देने में करेगा। इस आयु वर्ग में टीके की कमी का सामना करीब-करीब सभी राज्य कर रहे हैं। जरा गौर करिए, 1 मई से 12 मई तक 18-44 साल की आयु वालों को टीके की कुल 34.66 लाख डोज मिली हैं, जबकि जरूरत 1.20 अरब की है।

इस आयु वर्ग में 6.25 लाख डोज के साथ महाराष्ट्र सबसे आगे है। इसके बाद राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का नंबर आता है। लेकिन यह संख्या इतनी कम है कि इससे कोरोना की दूसरी लहर को रोकने में मदद नहीं मिलने वाली और इसकी वजह टीके की कमी है। सचाई यह भी है कि आज कोरोना के अधिक मरीज इसी आयु वर्ग के हैं। इसे देखते हुए टीकाकरण की रफ्तार में तुरंत तेजी लाने की जरूरत है।

इसका उपाय घरेलू कंपनियों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार से टीका खरीदना हो सकता है। कई राज्यों ने इसकी पहल की है। उन्होंने ग्लोबल टेंडर दिए हैं। लेकिन यहां भी राज्य कंपनियों से अलग-अलग बातचीत कर रहे हैं। अगर वे मिलकर मोलभाव करें तो इसकी लागत कम आएगी। साथ ही, राज्यों को एक कीमत पर टीका मिल सकेगा। 12 विपक्षी दलों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार से टीके की खरीद केंद्र सरकार करे। दिल्ली सरकार ने भी 100 टीकाकरण केंद्र बंद करने के ऐलान के साथ कहा कि टीका दिलाने की जिम्मेदारी केंद्र की है। वैसे, मोदी सरकार का कहना है कि पहले राज्यों ने ही वैक्सीन खरीदने को लेकर स्वायत्तता की मांग की थी। इस आरोप-प्रत्यारोप को रहने दें तो इस सचाई से कोई इनकार नहीं कर सकता कि देश आज टीके की जबरदस्त किल्लत से गुजर रहा है, जिसे तत्काल दूर करने की जरूरत है।

केंद्र ने हाल में इसके लिए कई कदम उठाए हैं। उसे अब एक कदम और आगे बढ़कर टीके की खरीद का जिम्मा अपने हाथों में लेना चाहिए। इससे वित्तीय संसाधनों की बचत होगी और राज्यों के लिए टीकाकरण अभियान में तेजी लाने का रास्ता भी साफ होगा। साथ ही, केंद्र को राज्यों के बीच टीके का बंटवारा भी इस तरह से करना होगा कि 18-44 साल आयुवर्ग के टीकाकरण को लेकर विषमता न पैदा हो। अभी ऐसी ही स्थिति दिख रही है। 18-44 आयुवर्ग में 85 फीसदी टीके सिर्फ सात राज्यों में लगे हैं। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में इस विषमता को रोकने का वादा किया था, उसे अपना वादा पूरा करना चाहिए।

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