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गांवों में फैला कोरोना

जहां एक ओर बुरी तरह प्रभावित राज्यों और बड़े शहरों में कोरोना संक्रमण की स्थिति में हल्का सुधार दिखने से राहत महसूस की जा रही है, वहीं दूसरी ओर महामारी के गांवों में तेजी से फैलने के संकेत दिख रहे हैं। बिहार, यूपी के जिलों में गंगा और यमुना में सौ से ज्यादा लाशें बहती पाई गई हैं। इस मामले की जांच हो रही है। पता किया जा रहा है कि ये शव आखिर कहां के हैं और इन लोगों की मौत के वास्तविक कारण क्या हैं। लेकिन ऐसी अटकलें लग रही हैं कि कोरोना फैलने से गांवों में मृतकों का अंतिम संस्कार करना संभव नहीं हो पा रहा और शव नदियों में बहाए जा रहे हैं। गांवों में बड़े पैमाने पर टेस्ट की सुविधा नहीं है, लेकिन जितने भी टेस्ट हो रहे हैं, उनमें पॉजिटिव नतीजों का ज्यादा अनुपात बताता है कि संक्रमण स्तर काफी बढ़ा हुआ है। ऐसे में यह संभावना मजबूत हो जाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बहुत सारे मामले कोरोना के रूप में चिह्वित नहीं हो पाते होंगे।

फिर भी, जो मामले पकड़ में आ रहे हैं, उनके आंकड़े इतना तो स्पष्ट कर ही देते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में हालात काफी तेजी से बिगड़े हैं। उदाहरण के लिए 9 अप्रैल से 9 मई के बीच विभिन्न राज्यों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की बदली स्थिति पर नजर डाली जा सकती है। बिहार में 9 अप्रैल को कोरोना संक्रमण के मामले शहरी क्षेत्रों में 47 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 53 फीसदी थे। एक महीने बाद 9 मई को शहरी क्षेत्रों के मामले जहां 24 फीसदी पर आ गए, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में ये बढ़कर 76 फीसदी पर पहुंच गए। यूपी में 9 अप्रैल को ग्रामीण क्षेत्रों का अनुपात 49 फीसदी था, जो 9 मई को बढ़कर 65 फीसदी हो गया था। महाराष्ट्र (32 से 56), छत्तीसगढ़ (56 से 89),आंध्रप्रदेश (53 से 72) जैसे अन्य राज्य भी इसी स्थिति की ओर संकेत करते हैं। यह स्थिति ज्यादा गंभीर इसलिए है कि एक तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच कम है, दूसरे वहां लोगों का एक-दूसरे से दूरी बरतना भी सहज नहीं है।

ऐसे में एकमात्र उपाय यही बच जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाधिक स्वास्थ्य केंद्र खोलकर लोगों में जागरूकता लाने, टेस्ट की संख्या बढ़ाने आइसोलेशन सेंटर खोलने और चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने का काम तत्काल युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाए। वैक्सीन को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में झिझक और कई गलतफमियां भी हैं। इन्हें दूर करने के लिए सरकार को जरूरी अभियान चलाना चाहिए और इन इलाकों में टीकाकरण की रफ्तार में तेजी लानी चाहिए। तभी महामारी को हराने की ओर हम एक बड़ा कदम बढ़ा पाएंगे।

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