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कोरोना की दूसरी लहर

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने देश की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए हर हाल में इस पर काबू पाने की जरूरत बताई। बुधवार को देश में 35,871 नए केस दर्ज किए गए, जिनमें 23,179 मामले अकेले महाराष्ट्र के थे। कोरोना के नए मामलों में दूसरे और तीसरे नंबर पर केरल और पंजाब हैं जहां दो हजार से ऊपर केस सामने आए। लेकिन फिर भी यह मानना सही नहीं होगा कि कोरोना संक्रमण में दूसरी तेजी का खतरा सिर्फ इन्हीं राज्यों तक सीमित है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश के 16 राज्यों में स्थित कुल 70 जिले ऐसे हैं जहां इस महीने के पहले पखवाड़े के दौरान ऐक्टिव केसों की संख्या में 150 फीसदी तेजी दर्ज की गई है। साफ है कि वायरस का प्रकोप अभी भले ही महाराष्ट्र में केंद्रित दिख रहा हो, पर देश का बहुत बड़ा हिस्सा खतरे की जद में है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि लगभग नौ महीने दहशत के साये में जी लेने और फिर टीकाकरण अभियान शुरू हो जाने के बाद लोगों के मन से कोरोना का डर निकल गया है। जनजीवन के रास्ते पर आने के साथ ही लोग धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियों के आदी हो चले हैं। अर्थव्यवस्था की लगभग बंद पड़ गई गाड़ी के दोबारा चल पड़ने में इससे मदद मिल रही है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि दो गज दूरी रखने, मास्क पहनने और हाथ धोने जैसी मामूली सावधानियां भी अब लोगों को भारी लगने लगी हैं, जिससे महामारी की तेज वापसी का खतरा पैदा हो गया है। ध्यान रहे, दुनिया के लगभग सारे देश कोरोना की दो बड़ी लहरें झेल चुके हैं। भारत को हाल तक इसका अपवाद माना जा रहा था, लेकिन अभी की स्थितियों को यहां दूसरी लहर की शुरुआत की तरह देखा जाने लगा है। हमें इसके लिए अपनी तरफ से कोई गुंजाइश नहीं छोड़नी चाहिए, न ही अर्थव्यवस्था की गाड़ी को दोबारा ठप करने वाले देशव्यापी लॉकडाउन की आशंका बनने देना चाहिए। ऐसे में उपाय यही है कि वैक्सिनेशन और टेस्ट, दोनों में तेजी लाई जाए। जिन क्षेत्रों में नए केस कम आ रहे हैं, वहां वैक्सिनेशन पर जोर दिया जाए ताकि बाकी लोग संक्रमण से सुरक्षित रहें, लेकिन महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जहां संक्रमण व्यापक रूप ले चुका है, प्रधानमंत्री द्वारा सुझाई गई टीटीटी यानी ‘टेस्ट, ट्रेस, ट्रीट’ की आजमाई हुई पॉलिसी पर ज्यादा जोर दिया जाए।

वैक्सीन का सुरक्षा घेरा प्रभावी होने में वक्त लगता है। पहला डोज लेने के बाद दूसरा डोज और फिर एंटीबॉडी डिवेलप होने की प्रक्रिया- कुल मिलाकर 45 दिन बाद ही कोई व्यक्ति वायरस से सुरक्षित हो पाता है। जाहिर है, अधिक संक्रमण वाले क्षेत्रों में लोगों को टीके से ज्यादा भरोसा दूरी बरतने, मास्क पहनने जैसे उपायों पर ही करना होगा। इसके अलावा छोटे स्तर पर लॉकडाउन जैसे उपाय भी आजमाने ही होंगे। महामारी की दूसरी लहर को जल्द से जल्द काबू करने के सिवा कोई और रास्ता हमारे पास नहीं है।

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