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डेटा ट्रैफिक से आगे

इसी हफ्ते नोकिया की ओर से जारी एक स्टडी रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत में डेटा ट्रैफिक में 60 गुना बढ़ोतरी हुई है जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया है कि 5जी टेक्नॉलजी भले ही अभी भारत में न आई हो, लेकिन 5जी डिवाइस खरीदने वालों की देश में कोई कमी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक अपने यहां अभी ही 20 लाख ऐसी डिवाइस मौजूद हैं। इससे अंदाजा मिलता है कि मोबाइल टेक्नॉलजी में हो रहे बदलावों को लेकर देशवासियों में कितना उत्साह है। हालांकि पांच वर्षों के अंदर डेटा ट्रैफिक में 60 गुना बढ़ोतरी के पीछे कई फैक्टर रहे हैं, लेकिन बड़ी बात यह है कि इन सबके घटते-बढ़ते प्रभावों के बीच भी यह रुझान बढ़त पर ही जा रहा है। पिछले साल लॉकडाउन का दौर इसमें काफी मददगार साबित हुआ।

साल 2020 में डेटा ट्रैफिक में 36 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन अभी कहा जा रहा है कि वैक्सीन मिलने और कोरोना का फैलाव कम होने के बाद जैसे-जैसे स्कूल-कॉलेज और दफ्तर वगैरह खुलते जाएंगे, वैसे-वैसे डेटा यूज में कमी दर्ज की जा सकती है। लेकिन इस दौरान ओटीटी प्लैटफॉर्म की लोकप्रियता में आई उछाल और लोगों की ज्यादा से ज्यादा काम ऑनलाइन निपटाने की बढ़ी हुई आदत को रेखांकित करते हुए कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इस ट्रेंड में जल्दी कोई उतार नहीं आने वाला। बहरहाल, ज्यादा बड़ा सवाल यह है कि इस लगातार बढ़ते डेटा ट्रैफिक का नेचर कैसा है। इस लिहाज से गौर करें तो देश में इस्तेमाल हो रहा अधिकाधिक डेटा कन्ज्यूमिंग नेचर की गतिविधियों पर ही खर्च हो रहा है। इससे लोगों के दैनिक जीवन में थोड़ी गुणवत्ता जरूर आती है, लेकिन समाज की प्रॉडक्टिविटी बढ़ाने में खास मदद नहीं मिलती। इसे नापने का अच्छा तरीका यह देखना है कि इस डेटा का इस्तेमाल आम लोग अपनी कमाई बढ़ाने में कर पाते हैं या नहीं। निश्चित रूप से यूट्यूब जैसे मंचों ने आम लोगों को अपनी कला दिखाने के साथ-साथ कमाई करने का भी एक जरिया मुहैया कराया है, लेकिन इस्तेमाल हो रहे डेटा के अनुपात में ऐसे लोगों और उनके उत्पादों का दखल अभी भी बहुत कम है।

ध्यान रखना होगा कि यह बदलाव अपने आप नहीं होगा। कोई भी टेक्नॉलजी आती है तो उसे लाने वाली ताकतों का फोकस उससे खुद कमाई करने पर होता है। आम लोगों को कमाई का मौका देने वाली टेक्नॉलजी लाने या उपलब्ध टेक्नॉलजी को ही आम लोगों के लिए ज्यादा लाभदायक बनाने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत पड़ती है। इसलिए अच्छा होगा कि बढ़ते डेटा ट्रैफिक पर खुश होने के बजाय हम अपना ध्यान इसके प्रॉडक्टिव इस्तेमाल को बढ़ावा देने के तरीके खोजने पर लगाएं।

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