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अद्भुत, अविश्वसनीय

क्रिकेट यूं तो है ही अनिश्चितताओं का खेल, लेकिन टीम इंडिया ने मंगलवार को गाबा में जो कमाल दिखाया है, वह अनिश्चितता की सीमाओं को पार करके चमत्कार की श्रेणी में पहुंच गया है। 2-1 से मिली इस सीरीज विजय को जो चीज महत्वपूर्ण बनाती है, वह है टीम इंडिया की जबर्दस्त उतार-चढ़ावों से भरी यात्रा। इसी सीरीज की शुरुआत में उसको मात्र 36 रन पर ऑल आउट होने का झटका लगा था, जो खुद में एक रेकॉर्ड है। इसके बाद तो टीम इंडिया के डाई हार्ड फैंस ने भी उम्मीद छोड़ दी थी।

इस टेस्ट के बाद विराट कोहली जैसा बल्लेबाज और कप्तान भी पैटर्निटी लीव पर घर चला आया। टीम ने अगले ही मैच में शानदार वापसी की, लेकिन शारीरिक रूप से काफी नुकसान उठाने के बाद। चोटों ने अंत-अंत तक टीम का पीछा नहीं छोड़ा। घायल खिलाड़ियों की कतार तेज गेंदबाज कुलदीप सैनी के चोटिल होने के साथ अंतिम मैच में भी बढ़ती गई। इतनी चुनौतियों के साथ ब्रिस्बेन में चौथे टेस्ट मुकाबले के लिए टीम जमा हुई तो जीत या ड्रॉ से अलग पूरे मैच में 11 खिलाड़ी खड़े कर पाना भी कमाल समझा जा रहा था। पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने चुटकी ली- ‘बंदे पूरे न हो रहे हों तो मैं चला आऊं।’

जिस गाबा के मैदान पर 1988 के बाद से दुनिया की कोई टीम ऑस्ट्रेलिया को न हरा पाई हो, वहां चौथी पारी में 328 रन का टारगेट टीम इंडिया के सामने देख टेस्ट मैचों के पुराने शहंशाह सुनील गावस्कर ने चुनिंदा शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी- ‘ऑस्ट्रेलिया जीतेगा या मैच ड्रॉ होगा।’ लेकिन आखिरी दिन चाय के बाद का खेल शुरू हुआ तो लगा कि अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में टीम यह मैच जीतने का मन बना रही है। इसका अंदाजा यों तो रहाणे की रफ्तार से ही मिलने लगा था लेकिन खुद आउट होने के बाद बैटिंग का क्रम बदलकर उन्होंने ऋषभ पंत को मैदान में उतारा तो फिर शक की गुंजाइश ही नहीं रही।

पंत के अविजित 89 और शुभमन गिल के 91 रनों का अहम योगदान तो इस जीत में है ही, लेकिन इसकी धुरी निश्चित रूप से चेतेश्वर पुजारा बने, जिन्होंने टूटती पिच पर एक छोर पकड़कर 211 गेंदें खेलीं, जिनमें कई उनके शरीर पर लगीं। बतौर ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर और शार्दूल ठाकुर का उदय इस मैच की उपलब्धि है, पर इसकी सबसे बड़ी बात मोहम्मद सिराज के रूप में देश को तेज गेंदबाजी का एक नया सितारा हासिल होना है। नौ स्टार क्रिकेटरों की गैरमौजूदगी में देश की यूथ ब्रिगेड ने इस सीरीज में जो चमक बिखेरी है, उससे भारतीय टीम का उज्ज्वल भविष्य निखर आया है। इसके अलावा इस मैच का एक ऐतिहासिक योगदान यह माना जाएगा कि इसने टेस्ट क्रिकेट को संजीवनी दी है। दर्शकों की नई पीढ़ी ने शायद पहली बार जाना हो कि ऐसा रोमांच और नाटकीयता अन्य किसी भी खेल के लिए दूर की कौड़ी है।

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