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शक्ति संतुलन और कोरोना

आखिर यह तय हो गया कि अगले महीने होने वाले मलाबार नौसैनिक युद्धाभ्यास में भारत, जापान और अमेरिका के साथ ऑस्ट्रेलिया भी शामिल होगा। यह पहला मौका है जब चारों क्वाड देश इस कवायद में शामिल हो रहे हैं। इसकी अहमियत इस मायने में है कि साउथ चाइना सी ही नहीं भारत-चीन सीमा समेत समूचे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती चीनी आक्रामकता से ये चारों देश चिंतित हैं और इस पर अंकुश लगाने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत महसूस कर रहे हैं। मौजूदा माहौल में इसे चीन की हरकतों के खिलाफ बनते अंतरराष्ट्रीय जनमत का संकेत भी माना जा सकता है।

मगर क्वाड संदर्भों से थोड़ा परे जाते हुए एशिया में विभिन्न देशों के बदलते शक्ति समीकरणों की बात करें तो इसका जायजा लेने के लिए सोमवार को जारी एशिया पावर इंडेक्स की रिपोर्ट एक अच्छा जरिया हो सकती है। सिडनी स्थित थिंक टैंक लोवी इंस्टिट्यूट द्वारा हर साल जारी की जाने वाली इस रिपोर्ट में आर्थिक संबंध, रक्षा खर्च, आंतरिक स्थिरता, सूचनाओं का प्रवाह और भविष्य के अनुमानित संसाधन जैसे 128 कारकों के आधार पर एशियाई क्षेत्र में 26 देशों के प्रभाव का आकलन किया जाता है। ताजा रिपोर्ट की खासियत यह है कि इसमें कोरोना महामारी से आए बदलावों की विशेष तौर पर पड़ताल की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस से सही तरीके से न निपट पाने के कारण दुनिया पर अमेरिकी प्रभाव खासा कम हुआ है। महामारी के बेकाबू हो जाने से अमेरिका में संक्रमितों और मृतकों की संख्या बहुत बढ़ गई, दूसरी तरफ उसकी अर्थव्यवस्था को ऐसा धक्का लगा कि उससे उबर कर कोरोना पूर्व की स्थिति में पहुंचना 2024 तक ही संभव हो पाएगा। यही नहीं, डॉनल्ड ट्रंप की अगुआई में अमेरिका ने कई बहुपक्षीय समझौतों से एकतरफा अंदाज में निकल आने की जो प्रवृत्ति दिखाई, उसका भी काफी बुरा असर उसकी साख पर पड़ा। इन सबका मिला-जुला नतीजा यह रहा कि एशिया पावर इंडेक्स में उसे पिछले साल के मुकाबले तीन पॉइंट कम मिले, जो उसकी साख में लगे बट्टे का स्पष्ट संकेत है।

इसके बावजूद एशिया में असर की दृष्टि से अमेरिका की नंबर वन और चीन की नंबर दो पोजिशन पहले की ही तरह बनी हुई है। 26 देशों के इस इंडेक्स में ऑस्ट्रेलिया ने साउथ कोरिया को पीछे छोड़कर एक स्थान की बढ़त हासिल की। उसे पॉइंट मिले सांस्कृतिक और कूटनीतिक प्रभाव के मोर्चे पर, वह भी कोरोना महामारी से बेहतर ढंग से निपटने की एवज में। भारत इस क्षेत्र में अपने प्रभाव की दृष्टि से अमेरिका, चीन और जापान के बाद चौथे नंबर पर है, हालांकि उसके पॉइंट घटे हैं। बहरहाल, इस इंडेक्स का मकसद ही यह बताना है कि शक्ति संतुलन में किसी जगह को स्थायी न माना जाए। कोरोना महामारी ने हमें चाहे जितना भी नुकसान पहुंचाया हो, पर भीतरी- बाहरी चुनौतियों का कुशलता से सामना करते हुए हम न केवल अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं बल्कि दुनिया में अपना असर भी बढ़ा सकते हैं। क्वाड देशों के सम्मिलित युद्धाभ्यास को इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा सकता है।

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