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भारत और चीन के बीच सहमति के बिंदु

मॉस्को में गुरुवार देर रात चीनी और भारतीय विदेश मंत्रियों की मुलाकात ने निश्चित रूप से सहमति के कुछ ऐसे बिंदु रेखांकित किए जिनके आधार पर आगे बढ़कर दोनों देश सीमा पर जारी तनाव को कम कर सकते हैं। बातचीत के बाद दोनों ओर से जारी संयुक्त बयान में ऐसे पांच बिंदु बताए गए हैं जिनका समेकित तात्पर्य यह है कि मतभेदों को विवाद न बनने दिया जाए, दोनों पक्षों की सेनाएं एक-दूसरे से दूर हो जाएं और सुरक्षित दूरी बनाए रखें, भारत-चीन सीमा से जुड़े सारे समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन किया जाए, स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव मैकेनिज्म व अन्य तरीकों से दोनों पक्ष संवाद तथा बातचीत बनाए रखें और जब माहौल शांत हो जाए तब दोनों पक्ष आपसी विश्वास कायम करने के नए उपायों पर तेजी से काम करें।

इसमें दो राय नहीं कि मौजूदा माहौल में सहमति के ये बिंदु काफी मायने रखते हैं और इन पर तत्काल काम शुरू होना चाहिए। सीमा को लेकर मतभेद दोनों देशों में रहे ही हैं, लेकिन यह भी सही है कि भारत और चीन ने मतभेदों के बीच शांति बनाए रखना और सहयोग बढ़ाते जाना काफी हद तक सीख लिया था। इस लिहाज से पिछले छह महीनों में सीमा पर जिस तरह से तनाव बढ़ता गया उसे सामान्य नहीं कहा जा सकता। इस बीच 16 जून को गलवान घाटी में हिंसक झड़प के रूप में ऐसी घटना हो गई जिसकी कड़वाहट लंबे समय तक पीछा नहीं छोड़ेगी। यही नहीं, 7 सितंबर को सीमा पर फायरिंग भी हुई। इसमें कोई हताहत भले न हुआ हो, लेकिन 45 वर्षों में पहली बार हुई यह घटना दोनों पक्षों में बने तनाव की इंतिहा को तो दर्शाती ही है। ऐसे हालात यूं ही नहीं बन जाते। साफ है कि सीमा पर कुछ ऐसी जटिलताएं पैदा हो गई हैं जिन्हें सुलझाए बगैर वहां के हालात और मिजाज पहले जैसे नहीं किए जा सकते।

ध्यान रहे, सहमति के इन पांच बिंदुओं में यह बात कहीं नहीं आई है कि दोनों सेनाएं अप्रैल से पहले की स्थिति में वापस जाएं। आखिर तनाव की जड़ में तो यथास्थिति में आए हाल के बदलाव ही हैं। बाकी जो मतभेद हैं वे पहले से हैं और उन पर पहले जैसा रवैया चल सकता है। लेकिन नई उलझनों को सुलझाए बगैर विवादों का यह दौर खत्म होने की दिशा में नहीं बढ़ेगा। शायद उसी तरफ संकेत करते हुए भारत ने कहा है कि कौन सी सेना कितना पीछे हटेगी और उसकी प्रक्रिया क्या होगी, इसका फैसला सैन्य कमांडरों की बातचीत में होगा। बहरहाल, मसला चाहे जितना भी जटिल हो, उसे सुलझाने का उपाय बातचीत से ही निकलना है। इस लिहाज से सबसे अच्छी बात यही है कि दोनों पक्षों ने हर स्तर पर बातचीत जारी रखने का इरादा जताया है।

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