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गौतम गंभीर मेरी कप्तानी में खेले, यह मेरे लिए यादगार अहसास: नितीश राणा

अबुधाबी
कोलकाता नाइटराइडर्स (KKR) के बल्लेबाज नितीश राणा (Nitish Rana) ने कहा कि अपने प्रेरणादाई व्याख्यान के लिए मशहूर माइक होर्न (Mike Horn) की बातें सुनने के बाद उन्होंने असफलता को आत्मसात करना सीखा और तेज गेंदबाजों का सामना करने का डर दूर करने में सफल रहे। होर्न ने 2011 में वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम और 2014 की वर्ल्ड कप विजेता जर्मन फुटबॉल टीम के साथ काम किया था।

पिछले कुछ वर्षों से वह इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) फ्रैंचाइजी नाइटराइडर्स से भी जुड़े रहे। राना ने केकेआर की वेबसाइट से कहा, ‘मैं केकेआर की टीम से जुड़ने से पहले ही इंस्टाग्राम पर माइक होर्न से जुड़ चुका था।’ घरेलू स्तर पर दिल्ली की तरफ से खेलने वाले राणा 2018 में केकेआर से जुड़े थे। उसी वर्ष उनके आइडिअल गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) केकेआर को अपार सफलताएं दिलाने के बाद वापस दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) की टीम से जुड़ गए थे।

राणा ने कहा, ‘मैं जब उन्हें (होर्न) को देखता हूं तो हैरान होता हूं कि वे इतनी अधिक चीजों से कैसे तालमेल बिठाते हैं। जब मैं युवा था तो तेज गेंदबाजी का सामना करने से डरता था और मुझे संदेह था कि क्या मैं कभी 140 किमी की रफ्तार वाली गेंदबाजी का सामना कर पाऊंगा।’

उन्होंने कहा, ‘जब मैं निजी तौर पर उनसे मिला और उनके व्याख्यान सुने तो तब मुझे अहसास हुआ कि वह असफलता से नहीं डरते। वह केवल इतना जानते हैं कि उनसे कैसे लाभ हासिल करना है।’ राणा ने कहा, ‘मैंने उनका यह गुण आत्मसात करने का प्रयास किया। अगर आप ऐसी मानसिकता से कुछ भी करते हो तो आपको कुछ नुकसान नहीं होगा। आपको फायदा ही होगा और आप बेहतर प्रदर्शन करोगे।’

राणा की जिंदगी का वह यादगार क्षण था, जब उन्होंने दिल्ली में गंभीर की मौजूदगी वाली टीम की कप्तानी है क्योंकि वह भारतीय सलामी बल्लेबाज को देखते हुए ही आगे बढ़े थे। उन्होंने कहा, ‘हर कोई कहता था कि मैं क्रिकेटरों के ऐक्शन की अच्छी नकल करता हूं। इसलिए सभी कहते थे कि दादा (सौरभ गांगुली) की तरह ऐक्शन करो। इसलिए मैं शुरू में उनकी तरह खेला करता था। लेकिन जब मैं क्रिकेट को गंभीरता से लेना लगा तो वह गौतम गंभीर थे क्योंकि मैंने उन्हें क्लब में करीब से बल्लेबाजी करते हुए देखा था। मैंने उन्हें बल्लेबाजी करते हुए देखकर काफी कुछ सीखा।’

दोनों दिल्ली में क्लब क्रिकेट में साथ में खेले और राणा ने दिल्ली की तरफ से जब पहला रणजी मैच खेला तो गंभीर उनके कप्तान थे। गंभीर ने 2018 में कप्तानी छोड़ी, जिसके बाद राणा दिल्ली के कप्तान बने थे। राणा ने कहा, ‘अगर आप मेरे करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि कहोगे तो वह दिल्ली का कप्तान बनना थी। सबसे अच्छा अहसास यह था कि मैं कप्तान था और गंभीर (घरेलू क्रिकेट में) अपने आखिरी साल में खेल रहे थे। मैं अपना पहला साल उनकी कप्तानी में खेला और वह अपना आखिरी साल मेरी कप्तानी में खेले।’

उन्होंने कहा, ‘गंभीर ने कहा कि मैं दिल्ली की अगुवाई करने के लिए सही व्यक्ति हूं, जो व्यक्ति आपका आदर्श रहा हो यह उसका बयान था। यह मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण क्षण था।’

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