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Eco Friendly Ganesh idol : घर पर बनाएं ईको फ्रेंडली गणपति बप्पा की मूर्ति, जानें आसान तरीके

गणेश चतुर्थी 2020 : आज भक्त भगवान गणेश का स्वागत कर रहे हैं। गणेश चतुर्थी का दिन इस बार कुछ अलग रहेगा क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के कारण पंडालों में गणपति पूजा नहीं की जाएगी लेकिन फिर भी गणेश महोत्सव पर भक्तों की श्रद्धा और भक्तिभाव में कोई कमी नहीं है। लोग घरों में ईको फ्रेंडली गणपति बनाकर गणेश महोत्सव मना रहे हैं। आप भी अगर गणपति बप्पा को घर लाना चाहते हैं, तो केमिकल से बनी भगवान गणेश की मूर्ति की जगह ईको फ्रेंडली मूर्ति को प्राथमिकता दें. आप बहुत आसानी से घर पर भी भगवान गणेश की मूर्ति बना सकते हैं। 

 

इस तरह बनाएं गणपति (How to make Eco Friendly Ganesha Idol)
चिकनी मिट्टी लेकर पानी का इस्तेमाल इसे गूंथ लें।
अब इसके अलग- अलग टुकड़े तोड़कर शरीर के पार्ट्स बना लें। एक टुकड़े से मूर्ति का बेस बनाएं और फिर हाथ, पैर, सूंड, धड़, कान, और चेहरा बनाएं।
इसके बाद तैयार किए गए इन बॉडी पार्ट्स को जोड़ लें। छोटे टुकड़े से बनाए गए सिर को धड़ से जोड़ें। 
चिकनी मिट्टी से कर्व शेप में सूंड बनाएं और चेहरे के बीचों- बीच इसे जोड़ दें। 
गणपति मूर्ति के लिए हाथ बनाएं और इन्हें धड़ के दोनों तरफ जोड़ें।
इसके बाद छोटी- छोटी बॉल शेप से आंखें और कान बनाकर चेहरे पर लगा दें। और आपके इको- फ्रेंडली गणपति तैयार हैं।

 

यह टिप्स आएंगे काम-
आपको अगर जल्दबाजी में चिकनी मिट्टी नहीं मिलती तो आप मैदे या आटे को गूंथकर भी भगवान गणेश की मूर्ति बना सकते हैं। 
आप वाटर कलर की जगह हल्दी, दाल और घर में रखें मसालों का इस्तेमाल करके भी गणेश जी की मूर्ति बना सकते हैं।
आप मुकुट और कपड़ों के लिए आप कलरफुल पेपर या गिफ्ट रैपर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। 

 

इस तरह से करें गणपति मूर्ति स्थापना और पूजन 
सबसे पहले इस मंत्र का जाप करें- अस्य प्राण प्रतिषठन्तु अस्य प्राणा: क्षरंतु च। श्री गणपते त्वम सुप्रतिष्ठ वरदे भवेताम।। 
यह गणपति बप्पा का आवह्न मंत्र के साथ स्थापना मंत्र है। 
अब गणेश जी की प्रतिमा को जल एवं पंचामृत से स्नान कराएं और नए वस्त्र पहनाएं। 
इसके बाद उन्हें चंदन, रोली, इत्र, आभूषण, दूर्वा, पुष्प आदि अर्पित करें। 
गणेश जी के माथे पर सिंदूर लगाएं। 
उनको जनेऊ, मोदक, फल आदि चढ़ाएं। 
इसके बाद धूप, दीप आदि से आरती करें। 
गणेश जी की आरती गाएं।
आरती के बाद परिक्रमा करें।
अंत में कोई भी कमी या भूल के लिए गणपति महाराज से क्षमा मांगें।


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