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नौकरियों में भर्ती की नई व्यवस्था

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नैशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी (एनआरए) के गठन को मंजूरी दे दी है। यह एजेंसी केंद्र सरकार और पब्लिक सेक्टर बैंकों के नॉन गजेटेड पदों पर भर्ती की प्रक्रिया में एकरूपता लाएगी। अभी इस श्रेणी के तमाम पदों पर भर्ती की पूरी प्रक्रिया अलग-अलग एजेंसियां अपने-अपने ढंग से निपटाती हैं। इन सबकी परीक्षाएं अलग-अलग होती हैं, जिनका एक-दूसरे से कोई मतलब नहीं होता।

ऐसे में नियुक्ति के इच्छुक युवाओं को इन सब पर नजर रखनी होती है और जिस भी एजेंसी की तरफ से भर्ती की सूचना आए, उसके मुताबिक फॉर्म भरने से लेकर परीक्षा देने तक की पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। जाहिर है, इसमें उनके पैसे की ही नहीं ऊर्जा की भी बर्बादी होती है। नई व्यवस्था में एनआरए फिलहाल स्टाफ सिलेक्शन कमिशन (एसएसी), इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनेल सिलेक्शन (आईबीपीएस) और रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की तमाम भर्तियों के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) आयोजित करेगी और उसके आधार पर योग्य प्रत्याशियों को शॉर्टलिस्ट करके उनके नाम इन एजेंसियों को भेज देगी। इसके बाद संबंधित एजेंसियां एक स्तर तक अपनी क्षमता सिद्ध कर चुके इन उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए बुलाएंगी।

सीईटी स्कोरिंग तीन साल तक प्रभावी रहेगी और इसमें बैठने की कोई सीमा नहीं रखी गई है। मतलब यह कि जब तक उम्र है, तब तक कोई भी युवा चाहे जितनी बार भी सीईटी में बैठ सकता है। बहरहाल, अभी एनआरए गठन की प्रक्रिया शुरुआती स्तर में ही है और इससे संबंधित सारे प्रावधान अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं। फिर भी एक बात साफ है कि यह नई व्यवस्था नियुक्ति की प्रक्रिया की लंबाई को किसी रूप में कम नहीं करती, बल्कि इसमें एक परीक्षा और जोड़ देती है।

अलबत्ता इससे यह फायदा जरूर होगा कि भर्ती परीक्षाएं आयोजित करने वाले मौजूदा तंत्र पर दबाव कम होगा। अभी चाहे बैंकों की नियुक्तियां हों या रेलवे और एसएससी की, एक-डेढ़ हजार पदों के लिए भी लाखों की संख्या में आवेदन आ जाते हैं। हर एजेंसी को आवेदकों की इस भीड़ से अलग-अलग निपटना पड़ता है। सीईटी के जरिए प्राथमिक स्तर का फिल्टर लगेगा, जिसके बाद सीमित संख्या में ही प्रत्याशी मुख्य परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे, जिनके बीच से योग्य उम्मीदवारों का चयन ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। लेकिन खतरा यह है कि भर्ती एजेंसियों का दबाव कम करने की यह कवायद कहीं देश की नई पीढ़ी पर दबाव और ज्यादा बढ़ा न दे। हमें इस मोर्चे पर विशेष सावधानी रखते हुए ऐसे सचेत प्रयास करते रहने होंगे, जिससे सीईटी में सफल न हो पाने वाले युवा भी तनावग्रस्त न हों।

एक बड़ा सवाल आरक्षण की व्यवस्था से जुड़ा है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि सीईटी में आरक्षण की व्यवस्था को किस रूप में लागू किया जाएगा। उम्मीद करें कि टेस्ट के ब्यौरे सामने आने के साथ ही इस विषय में भी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

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