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JEE, NEET: सत्र बचाना जरूरी

इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं– जेईई और एनईईटी की तारीखें आगे खिसकाने की याचिकाएं खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये परीक्षाएं सितंबर में घोषित तारीखों पर ही ली जाएंगी। इस फैसले से देश के दोनों सबसे महत्वपूर्ण अंडरग्रैजुएट एंट्रेंस टेस्ट्स को लेकर बनी हुई अनिश्चितताएं खत्म हो गई हैं और लाखों स्टूडेंट्स ने चैन की सांस ली है।

कोरोना महामारी के कारण बनी असामान्य स्थितियों की वजह से ये परीक्षाएं पहले ही दो बार स्थगित की जा चुकी हैं। हालांकि देश में कोरोना का प्रकोप अब भी कम नहीं हुआ है और तमाम बुरी खबरों के बीच इन परीक्षाओं को लेकर छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता होनी स्वाभाविक है। परीक्षा केंद्रों पर बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स का इकट्ठा होना उनके लिए निश्चित रूप से खतरनाक है। परीक्षाओं को और आगे खिसकाने की अर्जी लेकर कोर्ट पहुंचे स्टूडेंट्स की बेचैनी को अदालत ने भी रेखांकित किया है। लेकिन दूसरी तरफ एक पूरा साल बर्बाद हो जाने की आशंका और अगले साल एक और बैच आ जाने के दबाव की भी अनदेखी नहीं की जा सकती, जिसका सामना इस साल 12वीं पास करने वाले लाखों स्टूडेंट्स कर रहे हैं।

लॉकडाउन के दौरान चौबीसों घंटे घर में बंद रहने की मजबूरी और चारों तरफ से मिल रही निराशाजानक खबरों के बीच अनिश्चितता की तलवार उनके करियर और भविष्य पर लटक रही है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह कोई सामान्य समय नहीं है और कुछ महीनों की देरी से आसमान नहीं टूट पड़ेगा। लेकिन उनकी नजर शायद पूरे परिदृश्य पर नहीं है। अगस्त बीतने को है।

इंजीनियरिंग और मेडिकल के एंट्रेंस टेस्ट ही नहीं हो पाए हैं, जबकि हर तरह के ग्रैजुएशन कोर्सेज में दूसरे साल की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से शुरू भी हो चुकी है। सबकी कोशिश है कि सेशन लेट न हो और जितना भी संभव हो, अकादमिक गतिविधियां चलती रहें। सिर्फ मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजेस में फर्स्ट ईयर के बैच हवा में हैं। महीने-दर-महीने आगे खिसकते हुए आधा सेमेस्टर पार हो गया। दोनों टेस्ट अगर इसी तरह कुछ और आगे टल गए तो अगला बैच आने से पहले इस सत्र का कोर्स कवर करना असंभव हो जाएगा।

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सामने कोई विकल्प ही नहीं बचा था। बीमारी का खतरा अपनी जगह है और लोगों के स्वास्थ्य का सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए सुरक्षा के सारे उपाय करने के निर्देश अदालत ने सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को दिए हैं। लेकिन बड़े से बड़े खतरे के बावजूद मानव समाज की गति को थमने नहीं दिया जा सकता। एक पूरे साल देश को नए डॉक्टर और इंजीनियर न मिलें और युवाओं से उनके सपनों का आसमान छिन जाए, यह स्थिति हरगिज मंजूर नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने सही कहा है कि हर संभव सावधानी बरती जाए, लेकिन परीक्षा अब और न टाली जाए। उम्मीद है कि इस फैसले के तर्क और इसकी भावना के अनुरूप अन्य प्रवेश परीक्षाओं को भी अब और टालने से बचा जाएगा।

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