Home Reviews यादगार विदाई के हकदार हैं महेंद्र सिंह धोनी

यादगार विदाई के हकदार हैं महेंद्र सिंह धोनी

लेखक: रौशन कुमार झा।।
महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास के साथ ही भारतीय क्रिकेट में एक युग का भी अंत हो गया। हर खिलाड़ी की इच्छा होती है कि वह अपने फैंस के सामने आखिरी घोषित मैच खेलकर अलविदा कहे। हालांकि भारतीय क्रिकेट में ऐसा सौभाग्य बहुत कम खिलाड़ियों को मिला है। जहां तक धोनी की बात है, तो उनकी फैन फॉलोइंग मौजूदा समय में किसी भी क्रिकेटर से ज्यादा है। वे चाहते तो उनकी यह ख्वाहिश पूरी हो सकती थी। लेकिन टेस्ट क्रिकेट की तरह धोनी ने सीमित ओवर के क्रिकेट में भी नीति-निर्धारकों को अपने करियर के बारे में फैसला नहीं करने दिया। खुद ही सम्मान के साथ विदा हो गए। हालांकि वे आईपीएल में खेलते रहेंगे।

पिछले साल वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफानल में रनआउट होने के बाद ही धोनी के रिटायरमेंट की अटकलें तेज हो गई थीं। कयास लग रहे थे कि धोनी अब दोबारा इंटरनैशनल क्रिकेट खेलते नजर नहीं आएंगे। काफी दिनों तक धोनी की चुप्पी और मैदान से दूर रहने के बाद अटकलें लगने लगीं कि शायद वह टी-20 वर्ल्ड कप खेलकर इंटरनैशनल क्रिकेट को अलविदा कहेंगे। कहा जाने लगा कि वे आईपीएल के रास्ते भारतीय टीम में वापसी करेंगे, क्योंकि पिछले एक साल में वे किसी भी तरह के क्रिकेट में नहीं दिखे थे। लेकिन, कोरोना की वजह से वर्ल्ड कप एक साल आगे खिसकने के बाद धोनी को शायद अहसास हो गया कि उनके लिए वापसी अब आसान नहीं होगी।

MS Dhoni: CSK has helped me learn art of handling tough situations ...यहां सवाल उठता है कि क्रिकेट प्रेमी या क्रिकेट पंडित किसी खिलाड़ी के बारे में किस आधार पर कोई अनुमान लगाने लग जाते हैं? इस अनुमान के पीछे खिलाड़ी का प्रदर्शन, उसकी उम्र या उसकी फिटनेस कोई आधार होता है या नहीं? अगर हम इन तीनों ही चीजों को लें, तो 2019 वर्ल्ड कप में धोनी भले ही भारतीय खिलाड़ियों में सबसे उम्रदराज थे, लेकिन प्रदर्शन और फिटनेस के मामले में वे किसी भी खिलाड़ी से कम नहीं थे। उनके आखिरी टूर्नामेंट की आखिरी पांच पारियों को देखें, जो कि वन-डे वर्ल्ड कप था, वहां उन्होंने नॉटआउट 56, नॉटआउट 42, 35, बैटिंग नहीं और फिर 50 रन की पारी खेली। ये पारियां उन्होंने निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए खेलीं, जहां कि खिलाड़ी को ड्रेसिंग रूम से ही सेट होकर मैदान पर उतरना होता है। उसे पहली ही गेंद से रन बटोरने होते हैं या फिर मुश्किल में फंसी टीम को उबारने की जिम्मेदारी उठानी होती है।

ऐसा प्रदर्शन करने के बाद भी किसी खिलाड़ी के संन्यास के बारे में अटकलें लगाकर उस पर दबाव बनाना कहां तक जायज है? विश्व क्रिकेट में धोनी अकेले क्रिकेटर हैं जिनके नाम 300 से ज्यादा मैच खेलने के बाद भी रिटायरमेंट के समय रन औसत 50 से ज्यादा का है।

धोनी ने तो अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले के बाद उन्हें बधाई देने वालों का भी तांता लग गया है। पूर्व दिग्गज से लेकर क्रिकेट में अपना भविष्य तलाश रहे खिलाड़ी तक उनकी तारीफ करने में जुटे हुए हैं। अगले कुछ दिनों तक यह सिलसिला जारी रहेगा। हो भी क्यों ना, धोनी ने जो ऐतिहासिक पल हमें दिए हैं, वे क्या भुलाए जा सकने वाले हैं? धोनी ने हमें मैदान पर जश्न मनाने के जितने मौके दिए, उतना किसी कप्तान से नहीं हो सका। ऐसे में क्या हमारा यह फर्ज नहीं बनता कि हम भी अपने इस महान खिलाड़ी को मैदान से ही जश्न के साथ विदा करें! हम उन्हें संन्यास से वापसी के लिए कहें और उनके लिए एक सीरीज आयोजित कर उन्हें यादगार विदाई दें।

MS Dhoni dropped from T20I series against West Indies, Australia ...यह सच है कि अभी कोरोना के चलते समय अनुकूल नहीं है। आईपीएल भी इस बार देश में नहीं हो रहा कि इसी टूर्नामेंट में अपने फैंस के सामने शानदार समारोह आयोजित कर उनकी विदाई को यादगार बना दिया जाता। हालांकि दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। अगर वह चाहे तो धोनी की विदाई को यादगार बना सकता है। ऐसा पहले हो भी चुका है।

डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं


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