Home Sport डेब्यू मैच में साथ खेले कैफ ने कहा,एमएस ने तोड़ीं कई परंपराएं

डेब्यू मैच में साथ खेले कैफ ने कहा,एमएस ने तोड़ीं कई परंपराएं

नई दिल्ली
दिसंबर 23, 2004 को मोहम्मद कैफ कभी नहीं भूल सकते। उस दिन बांग्लादेश के खिलाफ चटगांव में वनडे में भारतीय टॉप अर्डर लड़खड़ा गया था। राहुल द्रविड़ के साथ उनकी शानदार साझेदारी का अंत हुआ तो श्रीधरन श्रीराम भी जल्दी आउट हो गए। फिर क्रीज पर आया ‘लंबे बालों’ वाला वह खिलाड़ी जो डेब्यू कर रहा था। पहली ही गेंद को लेग साइड में ग्लांस करके उसने रन लेना चाहा। हां ना, हां ना में रन भी नहीं हुआ और क्रीज पर आया वह नया खिलाड़ी रन आउट हो गया।

कैफ ने उस मैच में 80 रन बनाए,मैन ऑफ द मैच बने और वह मैच भारत जीता भी। हालांकि, उन्हें लंबे बालों वाले उस नए खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी के लिए बहुत अफसोस हुआ। मैच के बाद वह उनके पास गए और गलती के लिए सॉरी कहा। धोनी के दिल में जो भी रहा हो लेकिन उन्होंने चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हुए ऐसा अहसास कराया जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं हो।

कैफ कहते हैं कि वह खुद छोटे शहर से आते थे और उन्हें पता था कि मौके को नहीं लपका गया तो हम जैसे खिलाड़ियों के लिए आगे मुश्किल हो सकती है। कैफ बताते हैं कि उसके बाद धोनी के अगले तीन मैच अच्छे नहीं रहे और तब उन्हें विशाखापत्तनम वनडे में पाकिस्तान के खिलाफ नंबर तीन पर उतारा गया जहां 148 रन की यादगार पारी खेलने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उस मैच में कैफ नंबर सात पर उतरे थे और कोई स्कोर नहीं कर सके थे।

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लीक से हटकर सब कुछ
कैफ ने बताया कि उन्होंने धोनी के बारे में पहली बार चर्चा रणजी टीम के अपने एक दोस्त से सुनी थी। उसने उन्हें बताया था कि रांची का एक लंबे बालों वाला विकेटकीपर बैट्समैन बहुत जोरदार शॉट्स मारता है। कैफ कहते हैं कि धोनी के बालों की चर्चा इसलिए होती थी क्योंकि आम तौर पर यह संभव नहीं था कि एक क्रिकेटर, वह भी छोटे शहर का, इस तरह के लंबे-लंबे बाल रखे। बकौल कैफ,’पुराने दौर के कोच इस तरह लंबे बाल रखने को या फिर बहुत ज्यादा सजने-संवरने पर ध्यान देने को ठीक नहीं मानते थे। सिर्फ और सिर्फ खेल पर फोकस करने पर उनका जोर होता था।’ कैफ मानते हैं कि धोनी ने बैटिंग,विकेटकीपिंग और खेल को लेकर अपने अप्रोच में सब कुछ अलग ढंग से किया। वह लीक से अलग हटकर चीजें करते थे और उसमें सफल भी रहते थे। अमूमन छोटी जगह से आया कोई खिलाड़ी इस तरह करने का साहस नहीं जुटा पाता लेकिन धोनी ने बेफिक्री से सब कुछ अपने अंदाज में किया।

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मामला जीन का है!
भारत के लिए 125 वनडे इंटरनैशनल खेल चुके कैफ कहते हैं कि धोनी हर तरह से अपरंपरागत थे। चाहे वह पर्सनैलिटी हो या फिर खेलने का अंदाज। कैफ कहते हैं, ‘मैं फिटनेस को लेकर बहुत सतर्क रहता था। जिम जाता था। खान-पान का खास ख्याल रखता था। लेकिन मैं जब तक टीम में रहा मैंने धोनी को कभी भी जिम में वर्कआउट करते नहीं देखा। वह खाने में भी सब कुछ एंजॉय करते थे। उनको नाप-तौलकर खाने की आदत नहीं थी।’ ऐसा करने के बावजूद धोनी इतने फिट कैसे थे? इस पर कैफ का कहना था कि मुझे लगता है कि मामला खेल को लेकर धोनी के जुनून का तो है ही, जीन का भी है। वह जिस जगह से आते हैं वहां लोग नेचरली ऐसे फिट होते हैं। कैफ बताते हैं, ‘धोनी के आने से पहले मुझे टीम का सबसे फिट और फास्ट खिलाड़ी माना जाता था लेकिन धोनी के पास इतना स्टैमिना था कि वह सब कुछ अलग लेवल पर लेकर गए।’ इंग्लैंड में ऐतिहासिक नेटवेस्ट ट्रोफी जीत के हीरो कैफ के मुताबिक टीम में आने के बाद धोनी, रनिंग बिटविन विकेट्स को भी अलग मुकाम तक ले गए।

धोनी की खूबी थी कि वह बोलते कम थे। चीजों को ऑब्जर्व करने में उनका भरोसा था। मगर करने की बारी आती तो वह सब कुछ अपने ही तरीके से करते। उन्हें अपने ऊपर पूरा यकीन था कि वह जो कर रहे हैं उसमें सफल होंगे।

मोहम्मद कैफ,टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी

आखिरी गेंद तक नो टेंशन
कैफ कहते हैं वह अपने करियर में ज्यादातर वैसी पोजिशन पर खेले जहां से मैच खत्म करने की उनकी जिम्मेदारी होती थी। उनके मन में यही चलता रहता था कि मैच किसी तरह आखिरी ओवर से पहले खत्म हो जाए। आखिरी गेंद की टेंशन लेने से हर कोई बचना चाहता है। मगर धोनी के आने के बाद चीजें बदल गईं। उन्होंने ड्रेसिंग रूम को यह भरोसा दिलाया कि खेल आखिरी गेंद तक भी गया तो कोई टेंशन नहीं। शायद यही वजह है कि रन आउट से रन आउट के बीच उनके करियर में ढेर सारे ‘नॉट आउट्स’ शामिल हैं।

रैना ने हैरान कर दिया
धोनी के साथ-साथ सुरेश रैना ने भी इंटरनैशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। संयोग से रैना के डेब्यू मैच में भी कैफ इलेवन में थे। उस मैच में रैना भी कोई स्कोर नहीं कर पाए थे। कैफ, रैना के संन्यास के फैसले से हैरान हैं। उन्होंने कहा, ‘रैना की उम्र अभी 33 साल ही है। मुझे नहीं मालूम कि उनके फैसले के पीछे क्या वजह है। मगर, मुझे लग रहा था कि वह फिर से वापसी करेंगे। उनमें काफी टैलंट है।’ डोमेस्टिक क्रिकेट में कैफ की कप्तानी में रैना यूपी से काफी मैच खेल चुके हैं। कैफ कहते हैं कि यूपी की रणजी ट्रोफी जीत में रैना का अहम योगदान रहा था। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह किसी भी चैलेंज के लिए तैयार रहते थे। कैफ ने बताया कि एक बार उन्होंने रणजी के एक मैच में ओपन करने को कहा। रैना तुरंत तैयार हो गए।

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