Home Reviews स्वतंत्रता दिवसः पुरुषार्थ की परीक्षा

स्वतंत्रता दिवसः पुरुषार्थ की परीक्षा

आजादी की सालगिरह हम हर साल मनाते रहे हैं, लेकिन इस बार की यह 73 वीं वर्षगांठ इस मायने में खास है कि स्थितियां अभी कुछ ज्यादा ही विकट हैं। कोरोना के रूप में एक ऐसा संकट पूरी दुनिया के सामने खड़ा है जिसने सब कुछ उलट-पलट कर रख दिया है। अब तक की हमारी प्रगति, हमारा उत्साह, अपने साथ-साथ पूरी दुनिया को बेहतर बनाने का हमारा संकल्प, सब कुछ जैसे दांव पर लग चुका है। मगर ऐसे कठिन पलों में ही मनुष्यता अपनी ताकत पहचानती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा को अवसर में तब्दील करने का मंत्र संभवतः इसी सोच के तहत दिया है। साथ में उन्होंने आत्मनिर्भर भारत का बड़ा लक्ष्य भी देश के सामने रखा है। हालांकि स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही आत्मनिर्भरता भारत का घोषित लक्ष्य रहती आई है। उदाहरण के लिए हरित क्रांति के जरिए खाद्यान्न उत्पादन के मामले में देश ने आत्मनिर्भरता हासिल की और अपनी जरूरत की लगभग सारी चीजें हम अपने देश में ही बनाते हैं। मगर संपूर्णता में देखें तो अलग-अलग दौर में इसे लेकर काफी घालमेल भी दिखता रहा है। कई बार हमने इसके विपरीत लक्ष्य निर्धारण कर उलटी दिशा में भी यात्रा शुरू की है। जैसे अस्सी के दशक में टीवी के कल-पुर्जे अन्य देशों से मंगवाकर अपने यहां टीवी बनाने की जो कवायद जारी थी, वह नब्बे के दशक की शुरुआत में ही नरसिंह राव सरकार की नई आर्थिक नीति से एक झटके में बिखर गई। यों भी भूमंडलीकरण के साथ आत्मनिर्भरता का मेल बैठना आसान नहीं था। आज भी आत्मनिर्भरता के इस आह्वान के साथ कई तरह के असमंजस जुड़े हैं जिन्हें दूर किए जाने की जरूरत है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल में समझाया कि आत्मनिर्भरता का मतलब विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं बल्कि स्वदेशी को प्राथमिकता देना है। इस क्रम में रक्षा क्षेत्र की 101 वस्तुएं विदेशों से न लाने का सरकार का हालिया फैसला खासा अहम है। मगर ऐसे फैसलों पर अमल सुनिश्चित करते हुए हमें यह भी समझना होगा कि किसी देश की असली आत्मनिर्भरता रिसर्च एंड डिवेलपमेंट के जरिए हासिल की जाने वाली विज्ञान और तकनीकी की उन्नति पर ही निर्भर करती है। इस क्षेत्र में ठोस प्रगति की बदौलत ही चीन आज अमेरिका की नंबर वन पोजिशन के लिए खतरा बना हुआ है और इसमें कमजोर पड़ने की वजह से जबर्दस्त उपलब्धियों और जीतोड़ प्रयासों के बावजूद दुनिया पर राज कर रही जापानी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां असली मुकाबला शुरू होने से पहले ही दम तोड़ने लगीं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की डेढ़ सौवीं जयंती (2 अक्टूबर 2019) और आजादी की 75वीं वर्षगांठ (15 अगस्त 2022) के बीच का समय हमारे लिए वैसे भी संकल्प का दौर है। अगर इस अवधि में हमने आत्मनिर्भरता की दिशा में कुछ ठोस कदम उठा लिए तो इस दौर को कोरोना के कहर से ज्यादा हमारे पुरुषार्थ के लिए याद किया जाएगा।

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को कर सकता है कमजोर वायु प्रदूषण, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

दिल्ली समेत उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में धुंध छाने और हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आने के बीच वैज्ञानिकों ने आगाह...

Covid-19: पिछले 24 घंटे में 59,105 लोगों ने दी संक्रमण को मात

देश में इस महीने में दूसरी बार 24 घंटे के अंदर 50 हजार से कम नए मामले सामने आए। वहीं, इस दौरान मरने वालों...

कोविड-19 : इजरायल में एक नवंबर से शुरू होगा टीके का परीक्षण

इजरायल के एक इंस्टीट्यूट ने कोविड-19 के लिए टीका तैयार किया है, जिसका नाम 'ब्रिलाइफ' है। अब स्वास्थ्य मंत्रालय और हेलसिंकी समिति ने इस...

कोविड-19 टीका के तीसरे चरण का परीक्षण भुवनेश्वर में जल्द होगा शुरू

कोविड-19 के खिलाफ स्वदेशी टीका कोवैक्सीन के इंसानों पर परीक्षण का तीसरा चरण जल्द ही यहां एक निजी अस्पताल में शुरू होगा । एक...

Recent Comments