Home Sport ये 'माही' का कॉन्फिडेंस ही था, जिसने उन्हें कैप्टन कूल बनाया!

ये ‘माही’ का कॉन्फिडेंस ही था, जिसने उन्हें कैप्टन कूल बनाया!

नई दिल्ली
महेंद्र सिंह धोनी इंटरनैशनल क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं। उनके फैन्स अचानक किए गए ऐलान से काफी स्तब्ध हैं। धोनी की जितनी तारीफ की जाए कम है। उन्होंने इंडियन क्रिकेट को जो कुछ दिया है, उसे हमेशा याद रखा जाएगा। आने वाले लंबे समय तक क्रिकेट कैप्टन की तुलना धोनी से होती रहेगी। इस बीच रांची के सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के खिलाड़ी और महेंद्र सिंह धोनी के शुरुआत कोच में से एक आदिल हुसैन ने बताया कि धोनी ने अपनी क्रिकेट शैली में बचपन से लेकर बड़े होने तक कोई खास बदलाव नहीं किया।

आत्मविश्वास से लबरेज रहते थे धोनी
उन्होंने कहा कि वे हमेशा आत्मविश्वास से लबरेज होकर क्रिकेट मैदान में उतरते थे जो उनके पूरे करियर में उनकी पहचान बनी रही। धोनी ने अपने इंस्टाग्राम संदेश के माध्यम से इंटरनैशनल क्रिकेट से अपने संन्यास की घोषणा कर दी और सबका शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि शाम सात बजकर 29 मिनट से मुझे रिटायर समझें।

‘धोनी का रवैया और उनका व्यक्तित्व मेरे लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण था’

शानदार फिनिशर के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे धोनी
वर्ल्ड टी20, 50 ओवर वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रोफी जैसे खिताब भरने वाले धोनी को क्रिकेट पंडितों ने ‘कैप्टन कूल’ का नाम दिया। इसके लिए उनकी सोच-समझकर रणनीति बनाने और इंटरनैशनल क्रिकेट में जबर्दस्त प्रेशर के बीच भी विचलित ना होने का उनका अप्रोच जिम्मेदार था। यही कारण था एक युवा बल्लेबाज को जब 2007 में एकाएक कप्तानी थमाई गई तो उसने तुरंत आकर ‘चमत्कार’ कर दिखाया। यही नहीं, उनकी बल्लेबाजी में भी यही जज्बा दिखता था जोकि उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे शानदार ‘फिनिशर’ का दर्जा दिला गया।

कठिन समय में भी धैर्य नहीं खोते थे धोनी

धोनी ने स्टंप के पीछे रहते हुए कठिन समय में भी अपना धैर्य नहीं खोया और इसका हमेशा उनको फायदा मिलता रहा। वे लगातार एक्सपेरिमेंट्स करते रहते थे। कई बार ऐसा हुआ है जब मैच फंसा होता था तो धोनी द्वारा लिया गया अजूबा फैसला सबको चौंका देता था। लेकिन ज्यादातर मौकों पर उन्होंने अपने फैसले को सच साबित किया। उनका यह आत्मविश्वास ही था कि जो उन्हें दूसरे खिलाड़ी और स्कीपर से अलग करता था। वे बहुत सोच-समझ का फैसला लेते थे और फैसला लेने के बाद वे रिजल्ट के बारे में सोचे बगैर केवल उसपर आगे बढ़ते थे।

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