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Independence Day Shayari: दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फत…स्वतंत्रता दिवस पर पढ़ें शायरी

Independence Day Shayari: दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फत...स्वतंत्रता दिवस पर पढ़ें शायरी

Independence Day Shayari: 74वें स्वतंत्रता दिवस पर पढ़ें लोकप्रिया शायरी

खास बातें

  • स्वतंत्रता दिवस पर पढ़ें शायरी
  • 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है
  • लाल किले की प्राचीर से फहराया जाएगा तिरंगा

नई दिल्ली:

Independence Day Shayari: शनिवार को 74वां स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) मनाया जा रहा है. 15 अगस्त (15 August) की तैयारियां देशभर में जोर-शोर से चल रही हैं. स्वतंत्रता दिवस (Independence Day 2020) या 15 अगस्त के दिन 1947 में भारत को अंग्रेजी शासन से आजादी मिली थी और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा लहराया था. स्वतंत्रता दिवस के ऊपर बॉलीवुड में जहां कई गानें हैं तो वहीं इस मौके के लिए शानदार शायरी भी है. जिसमें इस मौके पर शेयर किया जा सकता है और व्हॉट्सऐप मैसेज के तौर पर शेयर भी किया जा सकता है. स्वतंत्रता दिवस (Independence Day Shayari) के मौके पर उर्दू की बेहतरीन शायरी. आजादी की शायरी (Azadi Ki Shayari) में आजादी और आजादी के मायनों को पिरोया गया है. 

स्वतंत्रता दिवस (Independence Day Shayari) के मौके पर पढ़ें शायरीः

यह भी पढ़ें

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है 

देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है 
बिस्मिल अज़ीमाबादी

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त 

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी 
लाल चन्द फ़लक

इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान 

अँधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान 
जावेद अख़्तर

उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता 

जिस मुल्क की सरहद की निगहबान हैं आँखें 
अज्ञात

हम भी तिरे बेटे हैं ज़रा देख हमें भी 

ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से शिकायत नहीं करते 
खुर्शीद अकबर

भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ 

दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ 
लाल चन्द फ़लक

कहाँ हैं आज वो शम-ए-वतन के परवाने 

बने हैं आज हक़ीक़त उन्हीं के अफ़्साने 
सिराज लखनवी

ऐ ख़ाक-ए-वतन अब तो वफ़ाओं का सिला दे 

मैं टूटती साँसों की फ़सीलों पे खड़ा हूँ 
जावेद अकरम फ़ारूक़ी

मैं ने आँखों में जला रखा है आज़ादी का तेल 

मत अंधेरों से डरा रख कि मैं जो हूँ सो हूँ 
अनीस अंसारी

क्या करिश्मा है मिरे जज़्बा-ए-आज़ादी का 

थी जो दीवार कभी अब है वो दर की सूरत 
अख़्तर अंसारी अकबराबादी

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