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इमर्जेंसी में ‘शोले’

लेखक: विवेक शुक्ला।।
साउथ एक्सटेंशन, अजमेरी गेट, मोती नगर वगैरह में ‘शोले’ के बड़े-बडे पोस्टर 15 अगस्त 1975 से पहले लग चुके थे। ये एक जैसे नहीं थे। कहीं अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र के हाथों में बंदूक थी और साथ में अमजद खान यानी गब्बर भी थे। अमजद की फोटो बड़ी थी इन दोनों से। कहीं-कहीं फिल्म के सभी प्रमुख कलाकारों की फोटो थी और बड़ा सा लिखा था ‘शोले’। इन्हें दिल्ली दायें से बायें और बायें से दायें बड़े चाव से देख रही थी।

‘शोले’ की संभावित कहानी दिल्ली फिल्म रिलीज होने से पहले डिस्कस कर रही थी। वह इमरजेंसी का दौर था। इमरजेंसी जून में लगी थी। माहौल में डर का भाव था। बहुत सारे विपक्षी दलों के नेता जेल में थे। उन हालात में ‘शोले’ आने से माहौल थोड़ा सहज ही हुआ था। देश और दिल्ली इमरजेंसी से इतर भी बातें करने लगी थी।
‘शोले’ के प्लाजा और अंबा में रिलीज होने से पहले ही टिकट लेने वालों की लंबी-लंबी लाइनें लगने लगीं। प्लाजा की भीड़ पर पुलिस नजर रख रही थी। प्लाजा में ‘शोले’ 70 एमएम के प्रिंट पर दिखाई जानी थी। इसलिए यहां अंबा की तुलना में भीड़ ज्यादा थी। अंबा में 35 एमएम का प्रिंट था।

20 Vintage Bollwood Posters Guaranteed To Snazz Up Your Living ...फिल्म रिलीज होते ही ‘शोले’ का जादू दिल्ली वालों पर सिर चढ़कर बोलने लगा। ‘कितने आदमी थे’,‘ बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना’, ‘यहां से पचास-पचास कोस दूर जब बच्चा रात को रोता है तो मां कहती है सो जा बेटे नहीं तो गब्बर आ जाएगा’,‘ इतना सन्नाटा क्यों है भाई’,‘सरदार मैंने आपका नमक खाया है’,‘हम अंग्रेज़ों के जमाने के जेलर हैं’,‘जेल में चक्की पीसिंग, एंड पीसिंग, एंड पीसिंग’ जैसे डॉयलाग दिल्ली बोलने लगी।

प्लाजा में ‘शोले’ देखने वालों की भीड़ कम नहीं हो रही थी और अंबा में बढ़ती जा रही थी। अंबा चूंकि दिल्ली यूनिवर्सिटी मेन कैंपस से सटा है, इसलिए वहां डीयू बिरादरी और नॉर्थ दिल्ली वाले मुख्य रूप से आ रहे थे। प्लाजा और अंबा के बाद नवंबर में मोरी गेट स्थित नोवल्टी ने ‘शोले’ को रिलीज किया। तीनों में शोले सिल्वर और फिर गोल्डन जुबली मनाती रही। कहते हैं कि 1935 में शुरू हुए नोवल्टी में दिल्ली की बदनाम बस्ती जी.बी.रोड की बेटियां भी ‘शोले’ 12 बजे का शो देखने आ रही थीं।

Amazon.com: Watch Sholay | Prime Videoदिल्ली के फिल्मी सीन पर नजर रखने वाले जिया उस सलाम कहते हैं सोहराब मोदी के मिनर्वा में ‘शोले’ काफी कोशिशों के बाद भी रिलीज नहीं हुई। यमुनापार और साउथ दिल्ली के भी सिनेमाघरों में यह रिलीज नहीं की गई। इन दोनों जगहों के फिल्मों के चाहने वाले अपने-अपने घरों से काफी दूर जाकर शोले देख रहे थे। हां, जी.पी. सिप्पी ने आगे चलकर साउथ एक्सटेंशन से कुछ आगे सिंधियों की कॉलोनी मेयफेयर गॉर्डन में शानदार बंगला बनवाया। हालांकि वह उजाड़ ही रहा।

डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं


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