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अमेरिका की कमला हैरिस

Edited By Shivendra Suman | नवभारत टाइम्स | Updated:

कमरा हैरिसकमरा हैरिस

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रैटिक प्रत्याशी जोसफ बाइडेन का अपनी ‘रनिंग मेट’ के तौर पर कमला हैरिस को चुनना कई लिहाज से महत्वपूर्ण है। वह किसी प्रमुख पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए मनोनीत होने वाली पहली अश्वेत महिला तो हैं ही, भारतीय मूल की पहली व्यक्ति भी हैं।

कमला हैरिस के पिता डॉनल्ड हैरिस जमैका से और मां श्यामला गोपालन भारत के तमिलनाडु से हैं। आज की तारीख में हैरिस की ये दोनों पहचानें काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। कहा जा रहा है कि इससे उन्हें उपेक्षित, उत्पीड़ित अमेरिकी नागरिक समूहों से जुड़ने में, उनकी तकलीफों, उनके संघर्षों को समझने में मदद मिलेगी। मगर उनकी उम्मीदवारी को अहमियत दिलाने में इन पहचानों से ज्यादा बड़ी भूमिका अब तक किए गए उनके कार्यो की मानी जा रही है।

पिछले साल अश्वेत अस्मिता के प्रतीक पुरुष मार्टिन लूथर किंग की जन्मतिथि के मौके पर उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी घोषित की थी, तब भी मीडिया में ज्यादा तवज्जो उनके काम को ही दी गई थी और अब उपराष्ट्रपति पद की रेस के लिए डेमोक्रैटिक पार्टी द्वारा मनोनीत किए जाने के बाद भी इसे ही उनका प्लस पॉइंट बताया जा रहा है। कमला हैरिस की जन्म की पहचान चाहे जो भी हो पर वह आधुनिक और उदार मूल्यों के लिए लड़ने वाली, मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली महिला के रूप में जानी जाती रही हैं।

2016 में सीनेटर चुने जाने से पहले वह कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल थीं। ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन की मौजूदा पृष्ठभूमि में अमेरिकी नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा उन्हें उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है। भारतीय समुदाय भी स्वाभाविक रूप से खासा उत्साहित है। हालांकि वोट बैंक के रूप में करीब 12 लाख वोटरों वाला अमेरिकी भारतीय समुदाय कोई खास बड़ा नहीं है, लेकिन प्रभाव की दृष्टि से वहां इसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि परंपरागत रूप से डेमोक्रैट समर्थक समझी जाने वाली इस बिरादरी का समर्थन हासिल करने के लिए डॉनल्ड ट्रंप काफी मशक्कत करते रहे हैं।

पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी उन्होंने ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ का भारत प्रेरित नारा उठा लिया था। हालांकि इसके बाद भी भारतीय समुदाय के अस्सी फीसदी वोट डेमोक्रैट प्रत्याशी हिलैरी क्लिंटन के ही पक्ष में गए थे। इस बार हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रंप जैसे आयोजनों के बाद बने माहौल को ध्यान में रखते हुए यह धारणा बन रही थी कि शायद पहली बार भारतीय समुदाय के एकमुश्त वोट रिपब्लिकन पार्टी की ओर चले जाएंगे। लेकिन कमला हैरिस की उम्मीदवारी के बाद ट्रंप की मेहनत शायद उतनी कारगर न साबित हो। बहरहाल, भारतीय होने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कमला हैरिस का श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों की नुमाइंदगी करना, जो न केवल अमेरिकी समाज के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए जरूरी हैं। यही वह चीज है जो उन्हें खास बनाती है और जिसकी कसौटी पर उन्हें लगातार कसा जाएगा।

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