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हिरोशिमा पर परमाणु हमले के 75 वर्ष – पीड़ितों ने चुना ‘उम्मीद और मेलमिलाप’ का मार्ग – HW News Hindi

यूएन प्रमुख ने अपने सम्बोधन में कहा, “75 वर्ष पहले सिर्फ़ परमाणु हथियार की वजह से इस शहर को अकथनीय मौत व तबाही का मंज़र देखना पड़ा. उसके प्रभाव आज महसूस किये जाते हैं.”

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि हिरोशिमा और वहाँ की जनता ने इस आपदा से ख़ुद को परिभाषित नहीं करने का चयन किया है. इसके बजाय, वे सहनक्षमता, पारस्परिक मेल-मिलाप और आशा का प्रदर्शिन करते हैं.

परमाणु हमले में बच गए लोगों को हीबाकुशा के नाम से जाना जाता है जिन्हें यूएन प्रमुख ने परमाणु निरस्त्रीकरण के अतुलनीय पैरोकार क़रार दिया है – उन्होंने अपनी त्रासदी को सम्पूर्ण मानवता की सुरक्षा व कल्याण के लिये पुरज़ोर आवाज़ में तब्दील कर दिया है.

दूसरे विश्व युद्ध में भारी तबाही और हिरोशिमा व नागासाकी शहरों पर परमाणु बमों की विभीषिका के बाद ही संयुक्त राष्ट्र की स्थापना भी उसी वर्ष, 1945 में, हुई थी.

“संयुक्त राष्ट्र ने अपने शुरुआती दिनों व संकल्पों से ही परमाणु शस्त्रों का पूरी तरह उन्मूलन किये जाने की ज़रूरत को पहचान दी है.” लेकिन इसके बावजूद यह लक्ष्य अभी हासिल नहीं किया जा सका है.

शस्त्र नियन्त्रण पर ढीली होती पकड़

यूएन प्रमुख ने बताया कि हथियारों पर नियन्त्रण, पारदर्शिता व पारस्परिक विश्वास बढ़ाने वाले औज़ार दूसरे विश्व युदेध के बाद स्थापित किये गए थे लेकिन इस व्यवस्था की परतें अब उधड़ रही हैं.

75 वर्ष बाद भी दुनिया को यह समझना है कि परमाणु हथियारों से सुरक्षा बढ़ती नहीं है, बल्कि और भी ज़्यादा कमज़ोर होती है.

उन्होंने कहा कि सदस्य देशों में विभाजन, अविश्वास और सम्वाद की कमी एक ऐसे परिदृश्य में है जिसमें परमाणु जख़ीरों को आधुनिक बनाया जा रहा है और नए ख़तरनाक शस्त्र व प्रणाली विकसित की जा रही हैं.

उन्होंने आशंका जताई कि परमाणु हथियार मुक्त दुनिया कीासपना पकड़ से निकलता प्रतीत हो रहा है. महासचिव गुटेरेश ने सभी देशों से पुकार लगाई है कि एक साझा दूरदृष्टि अपनाते हुए परमाणु शस्त्रों के पूर्ण उन्मूलन के मार्ग पर लौटना होगा.

UN Photo/Mitsugu Kishida

हिरोशिमा पर परमाणु बम हमले के कुछ देर बाद का दृश्य.

सम्वाद का समय

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि इस दिशा में सभी देश सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं लेकिन परमाणु हथियार सम्पन्न देश की ज़्यादा ज़िम्मेदारी बनती है.

“अब सम्वाद बढ़ाने, विश्वास बढ़ाने वाले क़दम उठाने, परमाणु जख़ीरे का आकार घटाने और अधिकतम संयम बरतने का समय है.”

उन्होंने परमाणु अप्रसार व निरस्त्रीकरण के लिये स्थापित अन्तरराष्ट्रीय ढाँचे की सुरक्षा करने व और मज़बूत बनाने का आहवान करते हुए कहा कि वर्ष 2021 में परमाणु शस्त्र अप्रसार सन्धि के समीक्षा सम्मेलन में सदस्य देशों के पास साझा दूरदृष्टि अपनाने का अवसर होगा.

महासचिव ने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबन्ध सन्धि (CTBTO) के साथ-साथ परमाणु हथियारों पर पाबन्दी सन्धि के लागू होने की दिशा में पुरउम्मीद हैं.

हिरोशिमा पर परमाणु बम हमले पर यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया वैश्विक महामारी कोविड-19 का सामना कर रही है.

यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि इस महामारी ने दुनिया की अनेक कमज़ोरियाँ उजागर कर दी है – साथ ही परमाणु हथियारों का ख़तरा भी बरक़रार है.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि परमाणु ख़तरे का पूरी तरह अन्त करने के लिये परमाणु हथियारों का पूर्ण उन्मूलन ही एकमात्र रास्ता है.

ये भी पढ़ें – मानवता के ‘सर्वनाश का सबब’ हैं परमाणु हथियार

यूएन प्रमुख ने भरोसा दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र परमाणु मुक्त दुनिया के लक्ष्य को पाने की दिशा में निरन्तर प्रयासरत रहेगा.

यूएन महासभा के अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद बाँडे ने इस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि परमाणु युद्ध में कोई भी विजेता नहीं होता.

“हमें परमाणु निशस्त्रीकरण के लिये फिर से संकल्प लेना होगा क्योंकि परमाणु शस्त्रों से होने वाली तबाही कभी भी न्यायसंगत नहीं हो सकती.”

उन्होंने सभी से यह सकंल्प लेने और अथक प्रयास करने का आग्रह किया है.

महासभा अध्यक्ष ने परमाणु हथियारों पर प्रतिबन्ध की सन्धि को परमाणु निरस्त्रीकरण के लिये एक अहम पड़ाव बताते हुए कहा कि सभी सदस्य देशों को इस पर हस्ताक्षर करने और मोहर लगाने की ज़रूरत है.


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