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हल छठ व्रत आज, जानें इस व्रत से जुड़ी परंपरा और धार्मिक महत्व – Ameta

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हल छठ पर्व आज मनाया जा रहा है। इसे हर छठ, राधन छठ, हल छठी, हलषष्ठी एवं अन्य नामों से भी जाना जाता है। इस दिन संतान की दीर्घायु के लिए हलषष्ठी की व्रत रखा जाता है। हर छठ हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। हल बलरामजी का शस्त्र है। इसी कारण उन्हें हलधर भी कहा जाता है।

वहीं अन्य मान्यता के अनुसार, इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है। वे संतान की रक्षा करती हैं। यह व्रत अलग अलग राज्यों में अलग अगल तरीके से मनाया जाता है। गुजरात में यह त्योहार प्रमुख रूप से मनाया जाता है। राधन छठ के अगले दिन शीतला सप्तमी पर यहां घरों में चूल्हे नहीं जलाएं जाते हैं। राधन छठ के दिन ही यहां अगले दिन ही भोजन बना लिया जाता है।

उत्तर भारत में जन्माष्टमी से पहले पड़ने वाली इस छठ को हल षष्ठी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं संतान के सुखी और स्वस्थ्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन हल से जोतकर उगाई गई चीजों का सेवन नहीं किया जाता है। यहां इस त्योहार को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम से जो़ड़कर देखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि वे शेषनाग के अवतार हैं। शेषनाग पर ही भगवान विष्णु क्षीर सागर पर लेटे रहते हैं। यह व्रत पुत्रवती महिलाओं के लिए है। इस दिन महिलाएं अपने पुत्र की रक्षा के लिए हल की पूजा करती हैं।   

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद पूरे दिन निराहार रहना चाहिए। फिर शाम के समय पूजा-आरती के बाद फलाहार लिया जाता है। इस व्रत को करने से व्रती को धन, ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति भी होती है। छोटी कांटेदार झाड़ी की एक शाखा ,पलाश की एक शाखा और नारी जोकि एक प्रकार की लता होती है की एक शाखा को भूमि या किसी मिटटी भरे गमले में गाड़ कर पूजन किया जाता है। महिलाएं पड़िया वाली भैंस के दूध से बने दही और महुवा (सूखे फूल) को पलाश के पत्ते पर खा कर व्रत का समापन करती हैं।

इस दिन गाय के दूध व दही का सेवन करना वर्जित माना जाता है। इस दिन बिना हल चले धरती का अन्न व शाक भाजी खाने का विशेष महत्व है। इस व्रत को पुत्रवती स्त्रियों को विशेष तौर पर करना चाहिेए। हरछठ के दिन दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को पसही के चावल और महुए का पारण करने की मान्यता है।

हल छठ पर्व आज मनाया जा रहा है। इसे हर छठ, राधन छठ, हल छठी, हलषष्ठी एवं अन्य नामों से भी जाना जाता है। इस दिन संतान की दीर्घायु के लिए हलषष्ठी की व्रत रखा जाता है। हर छठ हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। हल बलरामजी का शस्त्र है। इसी कारण उन्हें हलधर भी कहा जाता है।

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