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कब से शुरू हुई 56 भोग की परंपरा – Ameta

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शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्योहार पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी 12 अगस्त को मनाई जाएगी। जन्माष्टमी पर भक्त खुशी से सराबोर होकर कृष्णजन्मोंत्सव का आनंद लेते हैं। लोग तरह तरह के पकवान बनाते हैं, कान्हा को खुश करने के लिए उन्हें उनके सबसे प्रिय खाद्य पदार्थ माखन मिश्री का भोग लगाया जाता है। कृष्ण जी को 56 भोग भी अर्पित किए जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि 56 भोग क्यों लगाएं जाते हैं और यह परंपरा कब से शुरु हुई जानते हैं।

एक बार सभी ब्रजवासी स्वर्ग के राजा इंद्रदेव की पूजा करने के लिए जा रहे थे। जिसके लिए बहुत बड़ी आयोजन किया जा रहा था। कृष्ण जी ने नंदबाबा से पूछा कि सभी लोग किसकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं, नंदबाबा ने कृष्ण जी को बताया कि सभी लोग वर्षा के देवता इंद्रदेव की पूजा करने की तैयारी कर रहें है, इससे वे प्रसन्न होकर बारिश करेंगे।

कृष्ण जी ने कहा कि वर्षा करना तो उनका कर्तव्य है। इसके लिए हम उनकी पूजा क्यों करें, पूजा करनी है, तो गोवर्धन पर्वत की करनी चाहिए, जिससे हमें फल-सब्जियां प्राप्त होती हैं, हमारे पशुओं को चारा प्राप्त होता है। सभी को कृष्ण जी की बातें सही लगी। जिसके बाद देवराज इंद्र की पूजा न करके सभी ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की।

इंद्रदेव ने इसे अपनी अपमान माना और इससे देवराज को अत्यधिक क्रोध आ गया, उन्होंने अपने संवर्तक को आदेश दिया कि वह भारी वर्षा करें। सभी तरफ मूसलाधार बारिश होने लगी देखते ही देखते हर ओर पानी नजर आने लगा। तेज आंधी और वर्षा के कारण पेड़ अपनी जगह से उखड़ गए, सभी गोकुल और ब्रजवासी घबरा गए। 

तभी इस संकट की घड़ी में कृष्ण जी ने कहा कि घबराने की आवश्यकता नहीं  है अब हमें गोवर्धन पर्वत ही शरण देंगे, और लोगों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए कृष्ण जी ने कनिष्ठा उंगली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। सभी ने गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली।

सात दिनों तक लगातार वर्षा होती रही। और कृष्ण जी ने सात दिनों तक बिना कुछ खाएं पिएं गोवर्धन को अपनी उंगली पर उठाए रखा। कृष्ण जी हर प्रहर अर्थात् आठ बार भोजन करते थे। सभी ने मिलकर आठ प्रहर के हिसाब से कृष्ण जी के लिए 56 भोग बनाए, माना जाता है कि तभी से 56 भोग लगाने की परंपरा शुरु हुई।
 

शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्योहार पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी 12 अगस्त को मनाई जाएगी। जन्माष्टमी पर भक्त खुशी से सराबोर होकर कृष्णजन्मोंत्सव का आनंद लेते हैं। लोग तरह तरह के पकवान बनाते हैं, कान्हा को खुश करने के लिए उन्हें उनके सबसे प्रिय खाद्य पदार्थ माखन मिश्री का भोग लगाया जाता है। कृष्ण जी को 56 भोग भी अर्पित किए जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि 56 भोग क्यों लगाएं जाते हैं और यह परंपरा कब से शुरु हुई जानते हैं।

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