Home Sport IPL और वीवो का साथ छूटा, बीसीसीआई के सामने क्या चुनौतियां

IPL और वीवो का साथ छूटा, बीसीसीआई के सामने क्या चुनौतियां

इस साल के आईपीएल के सामने लगातार नई चुनौतियां आ रही हैं। पहले कोरोना वायरस के चलते यह लीग टलती रही है। अब जब लग अगले महीने इस लीग का होना तय हो गया है तब टाइटल स्पॉन्सर वीवो पीछे हट गया है।

Edited By Bharat Malhotra | टाइम्सऑफइंडिया.कॉम | Updated:

बॉयकॉट चीन मुहिम का असर, IPL स्पॉन्सरशिप से पीछे हटी वीवोबॉयकॉट चीन मुहिम का असर, IPL स्पॉन्सरशिप से पीछे हटी वीवो

नई दिल्ली

भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव का असर आईपीएल (IPL) पर भी पड़ा है। IPL की टाइटल स्पॉन्सर चीनी कंपनी वीवो (VIVO) ने इस साल लीग से हाथ खींच लिए हैं। यानी इस सीजन के लिए आईपीएल के पास फिलहाल कोई टाइटल स्पॉन्सर नहीं है। बोर्ड को टाइटल स्पॉन्सरशिप से काफी कमाई होती है। बोर्ड के सामने अब विकल्प तलाशने की बड़ी चुनौती है। चलिए, समझते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है।

2022 तक है वीवो का कॉन्ट्रेक्ट

चीनी मोबाइल कंपनी वीवो की भारतीय शाखा वीवो इंडिया और बीसीसीआई (BCCI and VIVO) ने साल 2020 के इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के लिए अलग होने का फैसला किया है। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक क्रिकेट बोर्ड ने सोमवार को इस बात पर फैसला किया। हालांकि अगले साल के लिए रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं। यह सब साल 2021 के हालातों पर निर्भर करेगा। वीवो ने शुरुआत में 2015 में टाइटल स्पॉन्सरशिप के अधिकार हासिल कि थे। इसके बाद साल 2017 में वह पांच साल (2017-2022) तक एक बार फिर टाइटल स्पॉन्सर बना।



वीवो को साथ रखने से थे लोग नाराज


रविवार को आईपीएल की गर्वनिंग काउंसिल (IPL Governing Council) ने 2020 के लिए सभी स्पॉन्सर्स को कायम रखने का फैसला किया था। यूएई में 19 सितंबर से होने वाले इस टूर्नमेंट के लिए चीनी स्पॉन्सर्स को साथ रखने के फैसले का कड़ा विरोध हुआ। राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी बीसीसीआई को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी विवादों के बीच बोर्ड का यह फैसला लोगों को नागवार गुजरा। देश में चीन और चीन के बने सामानों का कड़ा विरोध हो रहा है और ऐसे में जब बोर्ड ने वीवो को साथ रखने का शुरुआती फैसला किया तो लोग भड़क उठे।



कोई कानूनी ऐक्शन नहीं


हालांकि, बोर्ड और टाइटल स्पॉन्सर के बीच बहुत कड़ा अनुबंध हैं। वीवो इंडिया को परिस्थितियों का अंदाजा है। वह देख रही है कि मार्केट और राजनीतिक माहौल उसके पक्ष में नहीं है। इसी वहज से वह सौहार्दपूर्ण तरीके से डील से बाहर निकली है। इसलिए, इस पूरी डील में कोई कानूनी कार्रवाही नहीं होगी।



आधे-आधे बंटते हैं पैसे


हालांकि, बीसीसीआई और आईपीएल फ्रैंचाईजी, भी सेंट्रलू पूल रेवेन्यू को 50-50 की दर से बांटने को बाध्य हैं। आईपीएल के 10 साल पूरे होने के बाद यह नियम लागू हुआ है। वीवो के साल के 440 करोड़ रुपये की स्पॉन्सरशिप का अर्थ है कि बीसीसीआई को इससे 220 करोड़ रुपे की कमाई होती और बाकी के 220 करोड़ रुपये आठों फ्रैंचाइजी में बराबर (हर फ्रैंचाइजी को 28 करोड़ रुपये) मिलते।

फ्रैंचाइजी को होगा बड़ा नुकसान!

अब, इस बार आईपीएल को ज्यादा गेट रेवेन्यू भी नहीं मिलेगा। क्योंकि यह इवेंट सिर्फ टीवी के लिए होने वाला है। हालांकि यूएई सरकार ने पहले हफ्ते के बाद सीमित संख्या में दर्शकों को मैदान में आने की अनुमति दे दी है लेकिन फिर भी मुख्य रूप से यह इवेंट टीवी के दर्शकों के लिए ही होगा। इसका अर्थ है कि हर मैच से करीब 3 से साढ़े तीन करोड़ रुपये का नुकसान होगा। यानी हर फ्रैंचाइजी को करीब 21-24 करोड़ रुपये। इसका अर्थ है कि हर फ्रैंचाइजी को करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अंदेशा है।



क्या मिलेगा नया स्पॉन्सर


क्या बोर्ड वीवो के ही वैल्यू में कोई दूसरा स्पॉन्सर तलाश सकता है? यह मुश्किल सवाल है, बाजार के हालात अच्छे नहीं हैं। कोरोना वायरस वैश्विक महामारी ने इस पर ब्रेक लगा दिया है। इसके साथ ही आईपीएल को शुरू होने में अब बमुश्किल 45 दिन बचे हैं।

वीवो ने छोड़ा आईपीएल का साथ!

वीवो ने छोड़ा आईपीएल का साथ!

Web Title all you need to know about ipl and vivo controversy(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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