Home Reviews कोरोना: कैसे बचे इकॉनमी

कोरोना: कैसे बचे इकॉनमी

कोरोना वायरस के खिलाफ छिड़ी विश्वव्यापी जंग का सबसे गंभीर पहलू अब सामने आ रहा है। बीते सप्ताह जारी हुए जीडीपी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले फ्रांस ने 13.8 फीसदी, जर्मनी ने 10.1 फीसदी, स्पेन ने 18.5 फीसदी और इटली ने 12.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका ने इस तिमाही में पिछले साल के मुकाबले 9.5 फीसदी की गिरावट देखी।

यह भीषण गिरावट साफ इशारा कर रही है कि सिर्फ ये गिनी-चुनी अर्थव्यवस्थाएं ही नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में पड़ गई है। लॉकडाउन भले इस संकट की शुरुआत का कारण बना हो, पर इसका उठाया जाना संकट का अंत नहीं साबित हो रहा। विभिन्न देशों में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बावजूद जिंदगी की पुरानी रौनक कहीं भी वापस नहीं लौटी है।

ऐसे में आर्थिक गतिविधियों का जाम हो चुका चक्का भी पुरानी रफ्तार नहीं हासिल कर पा रहा है, हालांकि इसके लिए कोशिशें पूरी की जा रही हैं। मई से ही की जा रही आर्थिक पैकेजों की घोषणा इन कोशिशों की धुरी है। यूरोपियन यूनियन ने अभी हाल में 750 अरब यूरो (878 अरब डॉलर) का रिकवरी फंड बनाने का फैसला किया है। इसका कैसा उपयोग होता है और आर्थिक हलचलों पर इसका क्या असर होता है, यह देखना होगा। लेकिन अमेरिका में इससे कोई खास फायदा नहीं हुआ है। वहां 3 लाख करोड़ डॉलर का आर्थिक पैकेज दिया जा चुका है, जिसका एक हिस्सा कंपनियों के खाते में इस मकसद से गया कि वे कर्मचारियों की छंटनी न करें तो दूसरा हिस्सा दसियों लाख बेरोजगारों को हर हफ्ते 600 डॉलर की सहायता देने में खर्च किया गया।

अब यह प्रक्रिया समाप्ति पर पहुंच रही है तो वहां दूसरे पैकेज की मांग तेज हो गई है, हालांकि जीडीपी के आंकड़े वहां अपनी ही कहानी कह रहे हैं। इस संदर्भ में भारत का अनुभव भी ज्यादा अलग नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित किया गया 20 लाख करोड़ का विशाल पैकेज कहां खर्च हुआ और उसका कितना फायदा हुआ, इसका हिसाब अभी आना बाकी है। यहां भी पिछले हफ्ते सीआईआई की बैठक में उद्योग जगत की ओर से लोन रीस्ट्रक्चर किए जाने की मांग मजबूती से उठाई जा चुकी है।

पैकेज का ठोस और पॉजिटिव असर अगर कहीं दिखता है तो चीन में, जहां मई महीने में अपेक्षाकृत छोटा पैकेज (जीडीपी का महज 4.6 फीसदी) घोषित किया गया। दिलचस्प है कि चीनी अर्थव्यवस्था ने पिछली तिमाही में क्लासिक वी शेप्ड रिकवरी की तरह नीचे से सीधे ऊपर जाने का रुझान दर्ज कराया। इस महत्वपूर्ण फर्क का सबसे बड़ा कारण यह है कि चीन ने कोरोना पर काबू पा लेने के बाद यह पैकेज घोषित किया, जिससे वहां आर्थिक गतिविधियां जोर पकड़ सकीं। लेकिन भारत और अमेरिका में वायरस से लड़ाई अभी खात्मे की ओर जाती नहीं दिख रही, लिहाजा हमें आर्थिक संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर करते हुए आगे बढ़ना होगा।

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

ऑस्ट्रेलियाई संग्रहालय में रखा जाएगा दुनिया के सबसे संरक्षित डायनासोर का जीवाश्म

ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े विक्टोरिया संग्रहालय में जल्द ही दुनिया के सबसे संरक्षित डायनासौर ट्राइसिरोटोप्टस के जीवाश्म रखे जाएंगे।  म्यूजियम विक्टोरिया ने बुधवार को...

Golgappe Recipe : इस तरीके से बनाएंगे तो मार्केट जैसे बनेंगे गोलगप्पे, जानें आसान रेसिपी

सर्दियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में इस मौसम में खाने-पीने का एक अपना ही मजा है। आप चटपटे के शौकीन हैं, तो आपको...

फाइजर-बायोएनटेक का टीका 65 से अधिक उम्र वालों के लिए भी सुरक्षित

ब्रिटेन के औषधि नियामक ने बुधवार को कहा कि फाइजर-बायोएनटेक द्वारा विकसित कोरोना टीका 65 वर्ष से अधिक उम्र के रोगियों में उपयोग के...

डियर वेजिटेरियन, आपकी थकान का कारण हो सकती विटामिन बी-12 की कमी

  विटामिन बी 12 की कमी सबसे आम पोषण संबंधी कमियों में से एक है। इस स्थिति के दो मुख्य कारण हैं वे प्रथाएं...

Recent Comments