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मंगल की मारामारी

लगभग एक साथ मिशन मंगल पर रवाना हुए 3 देशों के यानलगभग एक साथ मिशन मंगल पर रवाना हुए 3 देशों के यान

धरती से मंगल की ओर प्रस्थान करने वाले अंतरिक्षयानों की संख्या अचानक काफी बढ़ गई है। बीते सप्ताह एक नहीं, दो नहीं, तीन-तीन देशों ने अपने यान मंगल ग्रह के लिए रवाना किए। अमेरिका और चीन के अलावा संयुक्त अरब अमीरात तीसरा देश है, जिसने इस क्षेत्र में हाथ आजमाने का फैसला किया है। अंतरिक्ष की दौड़ में पिछड़े एशिया के लिए यह गौरव की बात है, हालांकि इस भागमभाग का मुख्य कारण मंगल और पृथ्वी के बीच की लगातार बदलती दूरी है। अपनी-अपनी कक्षा में सूर्य के चक्कर लगाते हुए पृथ्वी और मंगल कभी एक-दूसरे के करीब आते हैं तो कभी बहुत दूर चले जाते हैं। यह दूरी करीब साढ़े पांच करोड़ किलोमीटर से साढ़े नौ करोड़ किलोमीटर के बीच घटती-बढ़ती रहती है।

जाहिर है, पृथ्वी से मंगल की ओर कोई भी यान इस बदलती हुई दूरी को ध्यान में रखते हुए ही छोड़ा जाएगा। सबसे अच्छा वक्त वही हो सकता है जब मंगल पृथ्वी के करीब आ रहा हो और करीब सात महीने का रास्ता तय करने के बाद यान मंगल तक पहुंचे तो वह पृथ्वी के सबसे करीबी बिंदु के आसपास हो। एक बार निकल जाने के बाद यह वक्त 26 महीने बाद ही आता है, और यही वजह है कि तीनों देशों के यान लगभग एक साथ रवाना हुए। मगर तीनों देशों के इन अभियानों के मकसद ही नहीं, मायने भी काफी अलग-अलग हैं।

संयुक्त अरब अमीरात के लिए इस अभियान का सबसे ज्यादा भावनात्मक महत्व है। यह उसका पहला मंगल अभियान है और अगर सफल होता है तो ऐसा करने वाला वह पश्चिम एशिया या अरब जगत का ही नहीं बल्कि पहला मुस्लिम राष्ट्र होगा। संयोग कहें कि यह उसे ब्रिटेन से मिली आजादी का 50वां साल भी है। जाहिर है, यह उपलब्धि उसके लिए इस साल को बेहद खास बना देगी। अमेरिका और चीन के अभियानों के साथ कोई भावनात्मक पहलू नहीं जुड़ा है, लेकिन इनके उद्देश्य कहीं ज्यादा गंभीर हैं। चीन के मिशन में ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल हैं जो मंगल की सतह, उसके नीचे और ऊपर यानी वातावरण के बारे में और जानकारी जुटाएंगे।

नासा के मिशन में तो 1.8 किलोग्राम का एक छोटा सा हेलिकॉप्टर भी शामिल है। सब कुछ ठीक रहा तो यह पृथ्वी से इतर किसी अन्य पिंड पर उड़ान भरने वाला पहला हेलिकॉप्टर होगा। खास बात यह कि नासा के रोवर पर्सिवरंस को 2026 के अगले मिशन के जरिये पृथ्वी पर वापस लौटाने की योजना भी जुड़ी है। बेशक, मंगल पर मानव बस्ती अभी दूर की कौड़ी लग रही है और कोरोना से मरने वालों के लिए वहां एक अलग स्वर्ग बनाने जैसे मजाक चल रहे हैं, पर असंभव नहीं कि इन अभियानों की तेजी के सामने ऐसे कुछ मजाक इसी सदी में सच लगने लगें!

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