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लॉकडाउन में पति के और करीब आईं विद्या बालन, इनसाइडर-आउटसाइडर की बहस पर दिया रिऐक्‍शन

Vidya BalanVidya Balan

ऐक्‍टिंग का पावरहाउस कही जाने वाली बॉलिवुड ऐक्‍ट्रेस विद्या बालन ने अब तक अपने दमदार अभिनय और रोल्‍स से सिनेमा और समाज का प्रतिनिधित्व किया है। जल्द ही उनकी फिल्म ‘शकुंतला देवी’ ओटीटी प्लैटफॉर्म पर रिलीज होने वाली है।

विद्या ने नवभारत टाइम्‍स से खास बातचीत में फिल्म, लॉकडाउन, नेपोटिज्‍म, पति सिद्धार्थ रॉय कपूर, बॉडी शेमिंग और घरेलू हिंसा जैसे तमाम मुद्दों पर बात की। आइए डालते हैं एक नजर उनके इस दिलचस्‍प इंटरव्‍यू पर-



शकुंतला देवी के किरदार को जीते हुए आपका हाई पॉइंट क्या रहा?


‘मैं उनके बारे में बुनियादी तौर पर यह जानती थी कि उन्हें ह्यूमन कंप्यूटर का खिताब दिया गया था। मैं यह नहीं जानती थी कि अपने आप में ही उनकी जिंदगी बहुत दिलचस्प थी। वह हर लम्हे का लुफ्त उठाना चाहती थीं। एक औरत के लिए 50 साल पहले यह करना बहुत बड़ी बात है। वह दुनिया घूम रही थीं, पैसा और शौहरत कमा रही थीं लेकिन उन्हें यह कभी नहीं लगा कि मैं एक औरत हूं और मेरी जिंदगी में कुछ पाने की सीमा होनी चाहिए। मुझे लगा कि अगर वह 50 साल पहले ऐसे जी पाईं तो हम और आप क्या कर रहे हैं? क्यों अब तक हमने अपने आपको सबकुछ करने और पाने की छूट नहीं दी?’

शकुतंला देवी जानी-मानी गणितज्ञ थीं, आप अपने स्कूल के जमाने में गणित में कैसी थीं?

‘मैं मैथ्स में बहुत अच्छी थी। जो मैथ्स शोज मैंने किए, उसमें मुझे बड़ा मजा आया क्योंकि नंबर्स के साथ मेरा खास रिश्ता रहा है। हालांकि, जब मैं यह शोज कर रही थी तो मुझे एहसास हुआ कि शकुंतला देवी के मैथ्स शोज महज शोज नहीं थे, वे तो मैजिक शोज होते थे। ऐसा लगता था कि वह अपने दिमाग में ‘आबरा का डाबरा’ बोल रही हैं और उनके मुंह से आंसर निकल गया। वह उतनी आसानी से प्रॉब्लम सॉल्व कर देती थीं। उनकी वजह से लोगों को मैथ्स से डर कम लगने लगा था।’

NBT

Vidya Balan

लॉकडाउन में थिअटर्स के बंद होने के कारण ‘शकुंतला देवी’ के ओटीटी पर आने से आपके मन में कोई कसक है?

‘बिल्‍कुल नहीं। मुझे खुशी है कि फिल्म रिलीज हो रही है। पहले हमारी फिल्म थिअटर में 8 मई को रिलीज होने वाली थी और फिर लॉकडाउन के कारण सब उथल-पुथल हो गया। कम से कम आज हमारे पास यह ऑप्शन तो है कि हम फिल्म को दर्शकों तक पहुंचा पा रहे हैं। यह फिल्म 31 जुलाई को 200 देशों में रिलीज होगी। समय के साथ सबको उसी रूप में ढलना पड़ता है। जब थिअटर खुलेंगे तो फिल्में पहले की तरह रिलीज होंगी मगर आज की स्थिति को देखते हुए यह ऑप्शन सबसे बेस्ट है।’

लॉकडाउन में आपने कुकिंग में हाथ आजमाया?

‘मैंने कई चीजें कीं। मैं अपने आपको बहुत खुशनसीब समझती हूं। जब मैं यह सब देखती और सुनती हूं कि लोग कैसे इस मुश्किल परिस्थिति से गुजर रहे हैं तो मुझे लगता है कि मेरे साथ सब कुछ सही है। मुझे घर की साफ-सफाई करना पहले से ही अच्छा लगता था। हमारे घर पर बड़े-बड़े ग्लास विंडोज हैं तो मैं वह साफ करती थी। झाड़ू-पोछा करती थी। पौधों में पानी डालना और हां अब मैंने खाना पकाने की भी कोशिश की। मैंने कुछ डिशेज बनाईं जो ठीक-ठाक बन गईं। मेरा खाना बनाने का डर निकल गया है।’

लॉकडाउन में पति सिद्धार्थ से आपकी बॉन्डिंग कितनी मजबूत हुई?

‘बहुत अच्छा लगा क्योंकि पहली बार हमें साथ में इतना वक्त मिला और हमने उसे बहुत खूबसूरती से बिताया। इस दौरान हम साथ में काम करते थे। हमने एक-दूसरे से बहुत कुछ शेयर किया। हम साथ में तरह-तरह के शोज और न्यूज देखते थे, खाना खाते थे। हम दोनों के बीच सबकुछ बहुत अच्छा रहा। लॉकडाउन से पहले तो हमें सिर्फ एक संडे मिलता था लेकिन इस बार हमने इसे लंबी छुट्टियों की तरह बिताया। आराम भी बहुत मिला।’

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Siddharth Roy Kapur And Vidya Balan

आजकल फिल्म इंडस्ट्री में जो इनसाइडर और आउटसाइडर की बहस छिड़ी हुई है, उस पर आप क्या कहेंगी?

‘हां, मैं आउटसाइडर हूं पर मुझमें कभी इनसाइडर नाम की चाह ही नहीं थी क्योंकि मैं अपने काम से पहचाने जाना चाहती रही हूं। मुझे काम से फर्क पड़ता है। भगवान की दया से मुझे काम मिलता रहा है और मैं मेहनत करती रही हूं। कभी जैसा हम चाहते हैं, वैसा नहीं होता है, तब मैं अपने मन को यही आस दिलाती हूं कि मन का हो तो अच्छा और मन का न हो तो और भी अच्छा। यह हमारे पैरंट्स ने मेरी बहन और मुझे सिखाया है कि कभी आप जिंदगी में निराश हो सकते हैं, कभी गिर सकते हैं लेकिन जब तक आप हार नहीं मानते, तब तक आप हारते नहीं हैं। इन्हीं चीजों ने मुझे जिंदगी में मदद की है।’



नेपोटिज्‍म की बहस पर आपकी क्या राय है? आप तो गैर-फिल्मी परिवार से आई हैं।


‘आप चाहे किसी भी धर्म या प्रांत के हों, कोई भी भाषा बोलते हों, आपका रंग जो भी हो, आपका कद या वजन जो भी हो, हर किसी को इस इंडस्ट्री ने काम दिया और अपनाया है। यह दुनिया में अकेली एक ऐसी इंडस्ट्री है जहां सफलता ऑडियंस तय करती है। वह मौका शायद आपको किसी और से या फिल्मी परिवार से जुड़े रहने की वजह से मिल सकता हो मगर अंत में ऑडियंस तय करती है कि आप आगे बढ़ेंगे या नहीं।’



एक इंटरव्यू में आपने कहा था कि आपने कुछ वर्षों पहले अपने आपको प्यार करना शुरू किया?


‘हम सब अपने आपको बहुत जज करते हैं, खासकर लड़कियां। मैंने धीरे-धीरे अपने आपको जज करना कम किया। अभी भी बंद नहीं हुआ है पर पहले से बहुत कम हो गया है। जब आप अपने आपको जज नहीं करते हैं, तब स्वीकार करते हैं और अपने आपको प्यार करने लगते हैं। पहले मैं खुद को लेकर छोटी-छोटी बातों पर अपराधबोध से ग्रसित हो जाया करती थी। मैं एक अरसे तक बॉडी शेमिंग का शिकार भी रही मगर एक दिन मैंने आईने में देखकर सोचा कि यह जो लड़की दिख रही है, इसे मुझे स्वीकार करना होगा। मेरे लिए अब जिंदगी के मायने ही यही हैं कि आपको जिंदगी दी ही इसलिए जाती है ताकि आप अपने आपसे प्यार करो।’

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Vidya Balan

लॉकडाउन में कई परिवारो में घरेलू हिंसा में बढ़ोतरी हुई? आप उन महिलाओं से क्या कहना चाहेंगी?

‘मैं उनके लिए दुआ कर रही हूं ताकि वे इस माहौल से जल्द-से-जल्द अपने आपको बचाते हुए निकल पाएं। मैं यहां बैठकर बहुत आसानी से कह सकती हूं कि ऐसे रिश्ते से निकलना जरूरी है, वगैरह-वगैरह मगर जब तक आप उस स्थिति में नहीं हैं, यह समझ पाना बहुत मुश्किल है कि कोई मारपीट क्यों सहता है? घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाएं लोगों से मदद मांगे। यह जरूर जानें कि जो भी हो, किसी को भी मार खाने या हाथ उठाने का अधिकार नहीं है। चाहे वह आपके पति, बॉयफ्रेंड, भाई, बाप, बीवी, मां, बहन जो भी हों, वे आपको मारने का हक नहीं रखते हैं। मैंने सुना है कि कई औरतें अपने आपको समझा लेती हैं कि शादी में बाकी सब ठीक है, जब गुस्सा आता है, तब वह मारते हैं लेकिन इस कंडीशनिंग से निकलना होगा। वैसे मैंने सुना है कि इस लॉकडाउन में बहुत सारे मर्द भी इससे गुजरे हैं।’

शकुंतला देवी का ऑफिशल ट्रेलरशकुंतला देवी का ऑफिशल ट्रेलर

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