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अदालत में पायलट खेमे की दलील : कोरोना महामारी के बीच हमें जवाब देने के लिए सिर्फ तीन दिन मिले

राजस्थान में चल रही सियासी उथल-पुथल के बीच आज प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके सहयोगी 18 बागी विधायकों को जारी अयोग्यता नोटिस पर राजस्थान हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान पायलट खेमे की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि विधानसभा स्पीकर ने कोविड-19 महामारी के दौरान बागी विधायकों को नोटिस का जवाब देने के लिए सिर्फ तीन दिन का समय दिया, जो दिखाता है कि इन विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने का फैसला पहले ही लिया जा चुका था. उनका आगे कहना था कि स्पीकर ने यह नोटिस भेजते वक्त अपनी समझ का इस्तेमाल नहीं किया और अत्यधिक जल्दबाजी में बिना कोई कारण बताए सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों को नोटिस भेज दिया क्योंकि उन्होंने पार्टी की सिर्फ दो बैठकों में भाग नहीं लिया था.

इससे पहले सोमवार को भी उच्च न्यायालय में इस मामले को लेकर दोनों पक्षों की तरफ़ से जमकर बहस हुई थी. तब राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की तरफ से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि ‘जब तक स्पीकर बागी विधायकों से जुड़ा कोई निर्णय नहीं ले लेते, तब तक अदालत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है. सिर्फ नोटिस मिलने पर अदालत का रुख किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है.’ इस नोटिस की अवधि बीते शुक्रवार को खत्म होनी थी, लेकिन बागी विधायक अदालत चले गए थे, हाई कोर्ट ने इस मामले में मंगलवार तक कोई कार्रवाई न करने का आदेश दिया था.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बागी रुख अपनाए हुए सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री और राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद से दोनों खेमों के बीच की अदावत लगातार बढ़ती जा रही है. इस पर सोमवार को मुख्यमंत्री गहलोत ने मीडिया को दिए बयान में पायलट को नकारा, निकम्मा और धोखेबाज तक कह दिया था. अपने इस बयान की वजह से उन्हें जबरदस्त आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.

वहीं दूसरी तरफ इस सियासी संकट पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुप्पी तोड़ दी है. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया है कि कोरोना महामारी के दौरान राजस्थान सरकार को अस्थिर करना केंद्र सरकार की उपलब्धि है. गौरतलब है कि राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले सचिन पायलट की कांग्रेस से बगावत के बाद गांधी परिवार की तरफ से इस मामले में आई यह पहली प्रतक्रिया है.

अपने इस ट्वीट में राहुल गांधी ने तंजभरे लहजे में मोदी सरकार की बीते छह महीने की उपलब्धियों को क्रमवार तरीके से गिनवाते हुए लिखा- फरवरी में नमस्ते ट्रंप, मार्च में मध्यप्रदेश में सरकार गिराई, अप्रैल में मोमबत्ती जलवाई, मई में सरकार की छठवीं सालगिरह, जून में बिहार में वर्चुअल रैली, जुलाई में राजस्थान सरकार गिराने की कोशिश, इसलिए देश कोरोना की लड़ाई में ‘आत्मनिर्भर’ है. जानकार राहुल गांधी के इस ट्वीट को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पक्ष में देख रहे हैं.


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